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यूपी राजनीति

अखिलेश यादव का 2027 चुनाव न लड़ने का ऐलान क्या था

अखिलेश यादव ने वाराणसी में कहा कि 2027 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके तर्क और उसके बाद छिड़ी सियासी बहस।

अखिलेश यादव का 2027 चुनाव न लड़ने का ऐलान क्या था
फोटो: Wikimedia Commons / Prateek Dubey (CC BY 3.0)

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव न लड़ने के बयान के बाद से सूबे की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। खास तौर पर सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

अखिलेश यादव का बयान और टोटके का संदर्भ

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे उन्होंने एक तर्क दिया और माना कि जब वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तभी मुख्यमंत्री बनते हैं और इसी बात को वे टोटका या शुभ मानते हैं। रिपोर्टों में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि 2027 में वे सीधे लोकसभा सांसद रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

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अखिलेश यादव के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। विपक्ष के नेताओं ने उनके इस कदम को लेकर सवाल खड़े किए। चुनाव न लड़ने के फैसले को लेकर दिए गए उनके इस तर्क को लेकर राजनीतिक विरोधियों को निशाना साधने का पूरा मौका मिल गया है.

ओम प्रकाश राजभर का तीखा तंज

कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के इस बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। चार नवंबर 2026 के आसपास सोशल मीडिया और बयानों के जरिए राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसा कि जो नेता चुनाव से भागते हैं वे क्या नेता हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि आइए दो-दो हाथ हो जाएं और उनके इस टोटके वाले बयान पर भी कटाक्ष किया। राजभर ने अखिलेश यादव को रेडीमेड पार्टी का शहजादा भी बताया.

राजभर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कम से कम अखिलेश यादव को एक सीट से तो चुनाव लड़ ही लेना चाहिए था। अपने पोस्ट में उन्होंने बाबा विश्वनाथ और काल भैरव वाले प्रसंग का भी जिक्र किया। सुभासपा अध्यक्ष के इस आक्रामक तेवर से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है.

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चुनौतियों और राजनीतिक गठजोड़ का दौर

इससे पहले अक्टूबर 2026 में भी ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को राजनीतिक मैदान में उतरने की चुनौती दी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजभर ने तब अखिलेश को अयोध्या से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ या फिर जहूराबाद से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। सुभासपा वर्तमान में एनडीए और योगी सरकार में एक प्रमुख सहयोगी दल है और राजभर स्वयं राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.

अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के ऐलान और ओम प्रकाश राजभर की लगातार मिल रही चुनौतियों से आने वाले दिनों में सियासी पारा और चढ़ने के आसार हैं। एनडीए के सहयोगी के तौर पर राजभर लगातार समाजवादी पार्टी नेतृत्व पर हमलावर हैं। इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही उत्तर प्रदेश में बयानों की राजनीति चरम पर पहुंच चुकी है.

यह भी पढ़ें: राजभर का अखिलेश पर तंज | राजभर की चुनौती वाली खबर | चिल्लूपार सीट 2027

स्रोत: Aaj Tak, Navbharat Times, ABP Live, Times of India (अक्टूबर-नवंबर 2026); Aaj Tak

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