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चुनाव

2017 चिल्लूपार: बसपा की पतली जीत कैसे हुई

2017 में विनय शंकर तिवारी बसपा से सिर्फ 3,359 वोट से जीते थे। पांच साल बाद समीकरण कैसे बदला इसकी नींव।

2017 चिल्लूपार: बसपा की पतली जीत कैसे हुई
फोटो: Wikimedia Commons / StarlordHarsh (CC BY-SA 4.0)

चिल्लूपार विधानसभा सीट पर साल 2017 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी विनय शंकर तिवारी ने बहुत कम अंतर से जीत दर्ज की थी। इस मुकाबले में हार और जीत का अंतर केवल तीन हजार तीन सौ उन्सठ वोटों का रहा था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस जीत ने आने वाले समय के राजनीतिक बदलावों की नींव रख दी थी। साल 2017 के इन परिणामों और उसके बाद साल 2022 के चुनावों में बदले हुए समीकरणों को समझना इस क्षेत्र की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।

चिल्लूपार सीट का परिचय और दो हजार सत्रह का चुनावी गणित

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के अंतर्गत आने वाली चिल्लूपार विधानसभा सीट का क्रमांक तीन सौ अट्ठाइस है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल चार लाख इकतीस हजार चार सौ पचास मतदाता दर्ज किए गए थे। उस चुनाव में कुल इक्यावन दशमलव शून्य छह प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। इस मतदान के आधार पर सभी दलों के उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला हुआ था और कड़ा मुकाबला देखने को मिला था।

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साल 2017 के चुनाव परिणाम काफी रोमांचक रहे थे क्योंकि मुख्य दलों के बीच कांटे की टक्कर थी। बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे विनय शंकर तिवारी को कुल अठहत्तर हजार एक सौ सतहत्तर वोट मिले थे। उनका वोट प्रतिशत पैंतीस दशमलव आठ नौ रहा था। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बहुत ही मामूली अंतर से पीछे छोड़ा था और चिल्लूपार सीट पर पार्टी का झंडा बुलंद किया था।

भाजपा की चुनौती और सपा की स्थिति

साल 2017 के इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश त्रिपाठी को चौहत्तर हजार आठ सौ अठारह वोट प्राप्त हुए थे। उनका वोट प्रतिशत चौंतीस दशमलव तीन पांच रहा था। विजेता और उपविजेता के बीच का यह अंतर केवल तीन हजार तीन सौ उन्सठ वोटों का था जो यह दर्शाता है कि मुकाबला कितना संघर्षपूर्ण रहा था।

इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राम भुआल निषाद ने भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण टक्कर दी थी। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को पचपन हजार चार सौ बाईस वोट मिले थे और उनका वोट प्रतिशत पच्चीस दशमलव चार पांच दर्ज किया गया था। इस त्रिकोणीय मुकाबले ने साल 2017 में चिल्लूपार की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी और अगले चुनावों के लिए जमीन तैयार की थी।

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दो हजार बाईस में बदले हुए राजनीतिक समीकरण

साल 2017 की इस बेहद करीबी जीत के ठीक पांच साल बाद चिल्लूपार विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आए। साल 2022 के चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या चार लाख انतीस हजार नौ सौ आठ थी और कुल मतदान बयालीस दशमलव नौ आठ प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया था। पिछले चुनाव के मुकाबले राजनीतिक दलों के पाले और परिणाम बदल चुके थे।

साल 2022 के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश त्रिपाठी ने छियानवे हजार सात सौ सतहत्तर वोट हासिल किए और बयालीस दशमलव चार नौ प्रतिशत मत प्राप्त किए। वहीं दूसरी ओर साल 2017 में बहुजन समाज पार्टी से जीतने वाले विनय शंकर तिवारी साल 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे और उन्हें पचहत्तर हजार एक सौ बत्तीस वोट यानी बत्तीस दशमलव नौ आठ प्रतिशत मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के नए उम्मीदवार राजेंद्र सेही को पैंतालीस हजार सात सौ उतीस वोट यानी बीस दशमलव शून्य आठ प्रतिशत प्राप्त हुए थे और इस बार हार जीत का अंतर इक्कीस हजार छह सौ पैंतालीस वोटों का रहा था।

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स्रोत: Election Commission of India; UP Election News चिल्लूपार सीट लेख

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