इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट प्रयागराज की सबसे चर्चित शहरी सीटों में से एक है। यहां निर्दलीय, सपा, अपना दल, बसपा और भाजपा, सभी जीत चुके हैं। शहर का नाम 2018 में प्रयागराज हुआ, लेकिन चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में सीट का नाम इलाहाबाद पश्चिम ही है। इस लेख के आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टों से हैं।
इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट की पहचान
मौजूदा क्रमांक 261 है। परिसीमन से पहले यह 277 नंबर की सीट थी। 2022 में यहां 4,59,599 मतदाता थे। शहरी सीट होने के बावजूद यहां मतदान कम रहता है। यह 2012 में 51.74%, 2017 में 47.44% और 2022 में 48.49% रहा।
शुरुआती दौर
1967 में कांग्रेस के सी. एन. सिंह जीते। 1969 में निर्दलीय हबीब अहमद को जीत मिली। 1974 में भारतीय जनसंघ के तीरथ राम कोहली जीते। 1977 में जनता पार्टी के हबीब अहमद और 1980 में कांग्रेस (आई) के चौधरी नौनिहाल सिंह जीते। 1985 में लोकदल के गोपाल दास यादव को जीत मिली।
अतीक अहमद की लगातार जीत
1989 से 2002 तक अतीक अहमद यहां से लगातार पांच बार जीते। 1989, 1991 और 1993 में वह निर्दलीय जीते। 1996 में वह सपा और 2002 में अपना दल के टिकट पर जीते।
1991 में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर उन्हें 51.26% वोट मिले। 1993 में उन्होंने भाजपा के तीरथ राम कोहली को 9,317 वोटों से हराया। इन चुनावों में मुख्य मुकाबला निर्दलीय और भाजपा के बीच रहा।
1996 में उन्हें 53.98% वोट मिले और भाजपा के तीरथ राम कोहली 28.08% पर रहे। 2002 में उन्होंने सपा के गोपाल दास यादव को 11,808 वोटों से हराया। 2004 में वह फूलपुर से लोकसभा सांसद चुने गए, जिसके बाद सीट पर उपचुनाव हुए।
बसपा की पूजा पाल
2007 में बसपा की पूजा पाल ने सपा के खालिद अजीम उर्फ अशरफ को 10,322 वोटों से हराया। 2012 में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर उन्होंने अपना दल के अतीक अहमद को 8,885 वोटों से हराया। तब उन्हें 40.11% वोट मिले थे।
2017 में पूजा पाल 20.55% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। 2022 में वह कौशांबी जिले की चायल सीट से सपा के टिकट पर जीतीं।
भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह
2017 में भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह ने 85,518 वोट (43.40%) हासिल किए। उन्होंने सपा की ऋचा सिंह को 25,336 वोटों से हराया। वह योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रहे।
2022 का नतीजा
2022 में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर फिर वही मुकाबला हुआ। सिद्धार्थनाथ सिंह को 1,18,759 वोट (53.29%) मिले। ऋचा सिंह को 88,826 वोट (39.86%) मिले। अंतर 29,933 वोट रहा। बसपा 3.42% पर सिमट गई। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।
विश्लेषण: 2027 में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट
2017 से 2022 के बीच भाजपा का वोट शेयर करीब 10 अंक बढ़ा। सपा का हिस्सा भी 30.54% से 39.86% हुआ। बसपा का वोट 2017 के 20.55% से घटकर 3.42% रह गया। यानी बसपा का ज्यादातर वोट दोनों बड़े दलों में बंटा।
कम मतदान वाली इस सीट पर मतदाताओं को बूथ तक लाना 2027 में अहम होगा। प्रदेश के रुझानों पर हमारा 2027 ओपिनियन पोल और सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे की रिपोर्ट भी देखें।


