अयोध्या विधानसभा सीट यूपी की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। राम मंदिर आंदोलन के बाद से यहां भाजपा मजबूत रही है। फिर भी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड बताते हैं कि यह सीट भाजपा के लिए हमेशा आसान नहीं रही। इस लेख में 1967 से 2022 तक के नतीजे और बदलते समीकरण हैं।
अयोध्या विधानसभा सीट की पहचान
2008 के परिसीमन के बाद इस सीट का क्रमांक 275 है। पहले यह क्रमांक 134 और फिर 118 पर दर्ज थी। यह सामान्य सीट है और फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 में यहां 3,82,056 मतदाता थे।
1967 से 1989: बदलते दल
1967 में भारतीय जनसंघ के बी. किशोर जीते। 1969 में कांग्रेस और 1974 में फिर जनसंघ को जीत मिली। 1977 में जनता पार्टी के जय शंकर पांडेय विधायक बने।
1980 में कांग्रेस (आई) के निर्मल कुमार 50.17% वोट लेकर जीते। तब भाजपा को 17.14% वोट मिले थे। 1985 में कांग्रेस के सुरेंद्र प्रताप सिंह जीते और भाजपा का वोट 9.89% रह गया। 1989 में जनता दल के जय शंकर पांडेय फिर जीते।
लल्लू सिंह का दौर
राम मंदिर आंदोलन के बीच 1991 में भाजपा के लल्लू सिंह ने 51.30% वोट लेकर सीट जीती। इसके बाद वे 1993, 1996, 2002 और 2007 में भी जीते। 1993 में उन्हें 47.24% और सपा के जय शंकर पांडेय को 39.79% वोट मिले।
धीरे-धीरे भाजपा का अंतर घटता गया। 2002 में लल्लू सिंह का वोट 38.72% रहा। 2007 में उन्होंने सपा के इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू को 5,741 वोटों से हराया।
2012 में सपा की जीत
2012 में सपा के तेज नारायण पांडेय पवन ने 55,262 वोट (28.74%) लेकर लल्लू सिंह को 5,405 वोटों से हराया। बसपा के टिकट पर लड़े वेद प्रकाश गुप्ता 17.41% वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे। यह 1991 के बाद अयोध्या विधानसभा सीट पर भाजपा की पहली हार थी।

2017 और 2022 के नतीजे
2017 में अयोध्या विधानसभा सीट पर भाजपा ने वेद प्रकाश गुप्ता को उतारा। उन्हें 1,07,014 वोट (49.56%) मिले और उन्होंने पवन पांडेय को 50,440 वोटों से हराया।
2022 में दोनों फिर आमने-सामने थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, वेद प्रकाश गुप्ता को 1,13,414 वोट (49.04%) और पवन पांडेय को 93,424 वोट (40.40%) मिले। अंतर 19,990 वोट रहा। बसपा 7.66% पर सिमट गई। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की रिपोर्ट में हैं।
मतदान के आंकड़े लगभग स्थिर रहे हैं। 2012 में 60.71%, 2017 में 61.96% और 2022 में 60.53% मतदान हुआ। यानी तीनों चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी लगभग एक जैसी रही।
दिलचस्प है कि वेद प्रकाश गुप्ता 2002 में सपा, 2012 में बसपा और 2017 से भाजपा के टिकट पर लड़े।
लोकसभा का संदर्भ और 2027 का गणित
लल्लू सिंह 2014 और 2019 में फैजाबाद से भाजपा सांसद बने। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने उन्हें हराया। यह नतीजा जनवरी 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के कुछ महीने बाद आया।
अयोध्या विधानसभा सीट पर भाजपा 2017 और 2022 में आगे रही। लेकिन 2022 में उसका अंतर 2017 के मुकाबले आधे से भी कम रह गया। 2027 में अयोध्या विधानसभा सीट पर मुकाबला फिर भाजपा और सपा के बीच रहने की संभावना है।
अवध क्षेत्र के सर्वे पर हमारी रिपोर्ट अवध और बुंदेलखंड का चुनावी सर्वे पढ़ें। पूरे प्रदेश के अनुमान के लिए यूपी ओपिनियन पोल 2027 देखें।


