आजमगढ़ विधानसभा सीट पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां सपा के दुर्गा प्रसाद यादव 1985 से अब तक 9 बार जीत चुके हैं। लेकिन चुनावी आंकड़े बताते हैं कि 2012 के बाद हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर घटा है। इस लेख में सीट का इतिहास, पिछले नतीजे और 2027 से पहले का गणित है।
आजमगढ़ विधानसभा सीट की पहचान
परिसीमन के बाद 2008 से इस सीट का क्रमांक 347 है। यह आजमगढ़ जिले में है और आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से एक है। यह सामान्य सीट है।
आजमगढ़ शहर शिक्षा और साहित्य के लिए भी जाना जाता है। दारुल मुसन्निफीन शिबली अकादमी और शिबली नेशनल कॉलेज इसी शहर में हैं।
समाजवादी धारा से दुर्गा प्रसाद यादव तक
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड बताते हैं कि इस सीट पर शुरू से समाजवादी धारा का असर रहा है। 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बिसराम जीते। 1967 और 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के भीमा प्रसाद विधायक बने। 1977 और 1980 में कांग्रेस ने यह सीट जीती।
1985 में दुर्गा प्रसाद यादव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते। 1989 और 1991 में वे जनता दल से विधायक बने। 1993 में बसपा के राजबली यादव ने यह सीट जीती। यह दुर्गा प्रसाद यादव की इस सीट पर अकेली हार है।
1996 से 2022 तक दुर्गा प्रसाद यादव सपा के टिकट पर लगातार छह बार जीते। इस तरह आजमगढ़ विधानसभा सीट पर उनकी कुल जीत 9 हो गई है।
2022 का नतीजा
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में दुर्गा प्रसाद यादव को 1,00,813 वोट (42.66%) मिले। भाजपा के अखिलेश कुमार मिश्रा 84,777 वोट (35.87%) के साथ दूसरे नंबर पर रहे। जीत का अंतर 16,036 वोट रहा।
बसपा के सुशील कुमार सिंह को 39,281 वोट (16.62%) मिले। AIMIM के कमर कमाल को 5,532 वोट मिले। मतदान 59.64% रहा। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्ट में उपलब्ध हैं।
तीन चुनावों में बदला वोटों का गणित
आजमगढ़ विधानसभा सीट पर 2012 में सपा का अंतर 31,441 वोट था। 2017 में यह 26,262 और 2022 में 16,036 रह गया। इस दौरान सपा के वोट 88 हजार से 1 लाख के बीच रहे।
बदलाव दूसरी पार्टियों में दिखा। भाजपा का वोट प्रतिशत 2012 में सिर्फ 4.62% था। यह 2017 में 29.19% और 2022 में 35.87% हो गया। इसी दौरान बसपा 33.49% से गिरकर 16.62% पर आ गई।
जिला और लोकसभा का संदर्भ
2022 में आजमगढ़ विधानसभा सीट के साथ सपा ने जिले की सभी 10 सीटें जीतीं। आजमगढ़ मंडल की 21 में से 17 सीटें सपा गठबंधन को मिलीं।
लोकसभा में यह क्षेत्र यादव परिवार से जुड़ा रहा है। 2014 में मुलायम सिंह यादव और 2019 में अखिलेश यादव यहां से सांसद बने। 2022 के उपचुनाव में भाजपा के दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ जीते। 2024 में सपा के धर्मेंद्र यादव ने सीट वापस ली। मुलायम सिंह यादव पर हमारी रिपोर्ट मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पढ़ें।
विश्लेषण: 2027 में आजमगढ़ विधानसभा सीट का समीकरण
आंकड़ों के हिसाब से सपा अब भी आगे है, लेकिन बढ़त पहले जितनी बड़ी नहीं रही। बसपा के वोट जिस तरफ जाएंगे, उसका असर नतीजे पर पड़ सकता है। 2027 में सपा का उम्मीदवार कौन होगा, यह अभी तय नहीं है।
पड़ोसी जिले की सीटों के अनुमान के लिए जौनपुर ओपिनियन पोल 2027 पर हमारी रिपोर्ट भी देखें।


