गोरखपुर शहर सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में गिनी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी सीट से विधायक हैं। 1989 के बाद यहां भाजपा सिर्फ एक बार, 2002 में हारी है। इस लेख में सीट का इतिहास, पिछले तीन चुनावों के आंकड़े और 2027 से पहले की तस्वीर है।
गोरखपुर शहर सीट की पहचान
परिसीमन के बाद 2008 से इस सीट का क्रमांक 322 है। यह गोरखपुर जिले में है और गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से एक है। यह सामान्य सीट है, यानी आरक्षित नहीं है।
2022 के चुनाव में यहां कुल 4,64,784 मतदाता थे। गोरखपुर शहर सीट में शहर का बड़ा हिस्सा आता है। गोरखनाथ मठ भी इसी शहर में है, जिसके महंत योगी आदित्यनाथ हैं।
कांग्रेस से भाजपा तक: सीट का इतिहास
2008 के परिसीमन से पहले यह सीट ‘गोरखपुर’ नाम से जानी जाती थी। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, शुरुआती दशकों में यहां कांग्रेस और जनसंघ के बीच मुकाबला रहा। 1957 और 1962 में कांग्रेस जीती। 1967 में भारतीय जनसंघ और 1969 में कांग्रेस को जीत मिली। 1974 में जनसंघ और 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर अवधेश श्रीवास्तव जीते।
1980 और 1985 में कांग्रेस के सुनील शास्त्री विधायक बने। इसके बाद 1989 से 1996 तक भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला लगातार चार बार जीते।
2002 में राधा मोहन दास अग्रवाल हिंदू महासभा के टिकट पर जीते। इसके बाद अग्रवाल ने 2007, 2012 और 2017 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की।
2022 का नतीजा: योगी का पहला विधानसभा चुनाव
योगी आदित्यनाथ 1998 से 2017 तक पांच बार गोरखपुर से लोकसभा सांसद रहे। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद वे विधान परिषद के सदस्य बने। 2022 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और इसके लिए गोरखपुर शहर सीट को चुना।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, योगी को 1,65,499 वोट यानी 66.18% वोट मिले। सपा की सुभावती शुक्ला 62,109 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहीं। जीत का अंतर 1,03,390 वोट रहा।
बसपा के ख्वाजा शमसुद्दीन को 8,023 और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर आजाद को 7,640 वोट मिले। कांग्रेस की डॉ. चेतना पांडेय को 2,880 वोट मिले। मतदान 53.80% रहा।
नामांकन के साथ दिए हलफनामे के ADR विश्लेषण के अनुसार, योगी ने 1,54,94,054 रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उन्होंने अपने खिलाफ कोई आपराधिक मामला घोषित नहीं किया था।
तीन चुनावों में कैसे बढ़ा अंतर
गोरखपुर शहर सीट पर 2012 में राधा मोहन दास अग्रवाल को 81,148 वोट मिले थे और वे 47,454 वोटों से जीते थे। 2017 में उनके वोट 1,22,221 हुए और अंतर 60,730 रहा। 2022 में विजेता के वोट 1,65,499 तक पहुंच गए।
मतदान प्रतिशत भी बढ़ा। यह 2012 में 46.19%, 2017 में 50.98% और 2022 में 53.80% रहा। ये आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्ट और सीट के रिकॉर्ड पर आधारित हैं।
गोरखपुर जिला और लोकसभा का संदर्भ
2022 में गोरखपुर जिले की सभी 9 विधानसभा सीटें NDA ने जीतीं। गोरखपुर मंडल की 28 में से 27 सीटें भी NDA के खाते में गईं।
लोकसभा में तस्वीर कुछ अलग रही है। 2018 के उपचुनाव में सपा के प्रवीण निषाद गोरखपुर से जीते थे। 2019 और 2024 में भाजपा के रवि किशन ने यह सीट जीती। यूपी के दूसरे इलाकों के सर्वे पर हमारी रिपोर्ट अवध और बुंदेलखंड का सर्वे में पढ़ें।
विश्लेषण: 2027 में गोरखपुर शहर सीट पर क्या देखना होगा
पिछले तीन चुनावों में विजेता का वोट प्रतिशत 49% से बढ़कर 66% हुआ है। विपक्ष के लिए एक लाख से ज्यादा वोटों का अंतर पाटना बड़ी चुनौती होगी। 2027 में योगी फिर यहीं से लड़ेंगे या नहीं, इसकी घोषणा अभी नहीं हुई है।
उम्मीदवार कोई भी हो, गोरखपुर शहर सीट पर मतदान प्रतिशत और विपक्ष का साझा उम्मीदवार अहम रहेंगे। प्रदेश स्तर के अनुमान के लिए 2027 के ओपिनियन पोल पर हमारी रिपोर्ट भी देखें।


