कैराना विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चर्चित सीटों में गिनी जाती है। यहां दशकों तक हुकुम सिंह का दबदबा रहा। 2017 और 2022 में समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन लगातार जीते। इस लेख के सभी आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टों से लिए गए हैं।
कैराना विधानसभा सीट की पहचान
2008 के परिसीमन के बाद इस सीट का क्रमांक 8 है। यह शामली जिले में है और कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इससे पहले इसका क्रमांक 411 और फिर 395 था। 2022 में यहां 3,22,423 मतदाता थे और 75.04% मतदान हुआ।
शुरुआती दशक
1957 में कांग्रेस के वीरेंद्र वर्मा यहां से जीते। 1962 में निर्दलीय चंदन सिंह और 1967 में कांग्रेस के एस. जंग को जीत मिली। 1969 में भारतीय क्रांति दल के चंद्रभान जीते।
हुकुम सिंह का दौर
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में हुकुम सिंह का नाम कुछ वर्षों में हुकम सिंह भी लिखा गया है। वह 1974 और 1985 में कांग्रेस के टिकट पर जीते। 1980 में वह जनता पार्टी (एस) से जीते।
1996 में वह भाजपा के टिकट पर लौटे और सपा के बाबू सिंह को 13,443 वोटों से हराया। इसके बाद 2002, 2007 और 2012 में भी कैराना विधानसभा सीट भाजपा के पास रही। 2002 में अंतर 10,483 और 2007 में 8,500 वोट रहा। 2012 में हुकुम सिंह ने बसपा के अनवर हसन को 19,543 वोटों से हराया।
बीच के चुनाव
1977 में जनता पार्टी के बशीर अहमद जीते। 1989 में निर्दलीय राजेश्वर बंसल को जीत मिली। 1991 और 1993 में जनता दल के मुनव्वर हसन जीते। 1991 में उन्हें 42.34% वोट मिले, जबकि कांग्रेस के हुकुम सिंह 27.80% पर रहे।
नाहिद हसन की जीत
2014 में हुकुम सिंह कैराना से लोकसभा सांसद चुने गए और विधानसभा सीट खाली हुई। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, उसी साल हुए उपचुनाव में सपा के नाहिद हसन जीते।
2017 में नाहिद हसन को 98,830 वोट (47.50%) मिले। भाजपा की मृगांका सिंह 77,668 वोट (37.33%) के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। अंतर 21,162 वोट रहा। मृगांका सिंह, हुकुम सिंह की बेटी हैं।
2022 का नतीजा
2022 में कैराना विधानसभा सीट पर फिर वही मुकाबला हुआ। नाहिद हसन को 1,31,035 वोट (54.16%) मिले। मृगांका सिंह को 1,05,148 वोट (43.46%) मिले। अंतर बढ़कर 25,887 वोट हो गया। बसपा के उम्मीदवार को सिर्फ 0.86% वोट मिले। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।
विश्लेषण: 2027 में कैराना विधानसभा सीट
कैराना विधानसभा सीट पर मतदान लगातार बढ़ा है। यह 2012 में 66.03%, 2017 में 69.56% और 2022 में 75.04% रहा। 2007 में रालोद के अरशद 44,983 वोट लेकर दूसरे स्थान पर थे।
2017 से 2022 के बीच सपा और भाजपा दोनों का वोट शेयर बढ़ा। सपा का हिस्सा 47.50% से 54.16% और भाजपा का 37.33% से 43.46% हुआ। इसका मतलब है कि मुकाबला लगभग पूरी तरह दो दलों के बीच सिमट गया।
2017 में रालोद को यहां 9.61% वोट मिले थे। 2022 में रालोद सपा के साथ गठबंधन में थी। 2027 में गठबंधनों की तस्वीर इस सीट का नतीजा तय करने में अहम होगी। प्रदेश के मौजूदा रुझानों पर हमारा 2027 ओपिनियन पोल और सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे की रिपोर्ट भी देखें।


