लखनऊ कैंट विधानसभा सीट राजधानी की सबसे चर्चित शहरी सीटों में से एक है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1991 से अब तक भाजपा यहां सिर्फ एक आम चुनाव हारी है। 2022 में यहां से जीते ब्रजेश पाठक बाद में उपमुख्यमंत्री बने। इस लेख में सीट का पूरा इतिहास है।
लखनऊ कैंट विधानसभा सीट की पहचान
2008 के परिसीमन के बाद इस सीट का क्रमांक 175 है। पहले यह लखनऊ कैंटोनमेंट नाम से क्रमांक 104 और 88 पर दर्ज थी। यह सामान्य सीट है और लखनऊ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 में यहां 3,68,156 मतदाता थे।
कांग्रेस का दौर
1967 में यहां निर्दलीय बी.पी. अवस्थी और 1969 में भारतीय क्रांति दल के सच्चिदानंद जीते। 1974 में कांग्रेस और 1977 में जनता पार्टी के कृष्ण कांत मिश्र विधायक बने।
इसके बाद कांग्रेस की प्रेमवती तिवारी 1980, 1985 और 1989 में लगातार तीन बार जीतीं। 1985 में उन्हें 71.50% वोट मिले थे, जबकि भाजपा 13.23% पर रही।
1991 से भाजपा
1991 में भाजपा के सतीश भाटिया ने 53.18% वोट लेकर प्रेमवती तिवारी को हराया। 1993 में वे फिर जीते। 1996, 2002 और 2007 में भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी विधायक बने। 1996 में उन्हें 63.82% वोट मिले थे।
इस तरह 1991 से 2007 तक लखनऊ कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा लगातार पांच चुनाव जीती। 2007 में सुरेश चंद्र तिवारी ने बसपा के अरविंद कुमार त्रिपाठी को 5,376 वोटों से हराया।
2012: कांग्रेस की वापसी
2012 में कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी ने 63,052 वोट (38.95%) लेकर सुरेश चंद्र तिवारी को 21,753 वोटों से हराया। यह 1991 के बाद लखनऊ कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा की इकलौती आम चुनाव हार है। रीता बहुगुणा जोशी पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी हैं। 2012 के चुनाव के समय वे प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष थीं।

2017, 2019 और 2022
2017 में रीता बहुगुणा जोशी भाजपा के टिकट पर उतरीं। उन्हें 95,402 वोट (51.21%) मिले और उन्होंने सपा की अपर्णा यादव को 33,796 वोटों से हराया। अपर्णा यादव मुलायम सिंह यादव के परिवार की बहू हैं, इसलिए यह मुकाबला काफी चर्चा में रहा। 2019 में प्रयागराज से सांसद बनने के बाद उन्होंने सीट छोड़ी। उसी साल हुए उपचुनाव में मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी 35 हजार से ज्यादा वोटों से जीते।
2022 में भाजपा के ब्रजेश पाठक को 1,08,147 वोट (54.70%) मिले। सपा के सुरेंद्र सिंह गांधी 68,635 वोट (34.71%) के साथ दूसरे नंबर पर रहे। अंतर 39,512 वोट रहा। बसपा को 5.27% और कांग्रेस को 3.29% वोट मिले। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 की रिपोर्ट में हैं।
विश्लेषण: 2027 में लखनऊ कैंट विधानसभा सीट
लखनऊ कैंट विधानसभा सीट पर मतदान कम रहता है। 2012 में यह 50.47% और 2022 में 53.70% रहा। भाजपा का वोट शेयर 2017 और 2022 दोनों में 50% से ऊपर रहा। सपा को 2022 में 34.71% वोट मिले, यानी अंतर अभी बड़ा है।
कांग्रेस ने यह सीट 2012 में जीती थी, लेकिन 2022 में वह 3.29% पर आ गई। कांग्रेस संगठन में बदलाव पर हमारी रिपोर्ट आराधना मिश्रा मोना का बयान पढ़ें। प्रदेश के अनुमान के लिए यूपी ओपिनियन पोल 2027 देखें।


