उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव द्वारा 2027 के विधानसभा चुनाव में स्वयं के न लड़ने की बात कहने के बाद राजभर ने उन्हें चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती दी है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासी गलियारों में चर्चाओं को जन्म दिया है।
अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ने का बयान
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इस निर्णय के पीछे अपने तर्क दिए और कहा कि जब वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तभी मुख्यमंत्री बनते हैं। अखिलेश यादव ने इसे एक प्रकार का टोटका या शुभ संकेत माना है।
रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव ने यह भी उल्लेख किया कि वे 2027 में सीधे लोकसभा सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अखिलेश यादव का यह रुख उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
ओम प्रकाश राजभर का तंज और चुनौती
कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के इस बयान पर सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार किया है। 4 नवंबर 2026 के आसपास दिए गए अपने बयान में राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि वह कैसा नेता है जो चुनाव से भाग रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव को सीधे चुनावी मैदान में आकर दो-दो हाथ करने की चुनौती दी है।
राजभर ने अखिलेश यादव के टोटके वाले बयान पर भी निशाना साधा और इसे टोना टोटका करार दिया। उन्होंने अखिलेश यादव को रेडीमेड पार्टी का शहजादा बताते हुए टिप्पणी की है। राजभर का कहना है कि नेता को कम से कम एक सीट से तो चुनाव लड़ना ही चाहिए। अपने पोस्ट में उन्होंने बाबा विश्वनाथ और काल भैरव का भी जिक्र किया है।
चुनावी मैदान में उतरने का दबाव
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को केवल हालिया बयान पर ही नहीं घेरा है बल्कि इससे पहले अक्टूबर 2026 में भी उन्होंने चुनौती दी थी। उस समय राजभर ने अखिलेश यादव को अयोध्या से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ या फिर जहूराबाद से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इस संबंध में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी जानकारी दी गई थी।
राजभर का यह आक्रामक रुख तब सामने आया है जब वे स्वयं एनडीए और योगी सरकार में एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्री के तौर पर राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं। जहूराबाद और अयोध्या जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करके उन्होंने अखिलेश यादव को अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के लिए ललकारा है।
राजनीतिक परिदृश्य और प्रतिक्रियाएं
अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के फैसले और उस पर ओम प्रकाश राजभर की तीखी प्रतिक्रिया ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ दिया है। एक तरफ अखिलेश यादव अपने पुराने टोटकों और चुनावी रणनीति पर अडिग दिख रहे हैं तो दूसरी तरफ राजभर उन्हें मैदान में उतरने के लिए मजबूर करने का प्रयास कर रहे हैं।
आज तक, एनबीटी, एबीपी लाइव और देशबंधु जैसे मीडिया संस्थानों ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रमुखता से कवर किया है। अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान सामने आए इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और अधिक तेज हो सकती है। राजभर की यह चुनौती अब राजनीतिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र बन गई है।
यह भी पढ़ें: राजभर का अखिलेश पर तंज | राजभर की चुनौती वाली खबर | चिल्लूपार सीट 2027
स्रोत: Aaj Tak, Navbharat Times, ABP Live, Times of India (अक्टूबर-नवंबर 2026); Aaj Tak
और पढ़ें: आपके लिए चुनी गई ख़बरें → (प्रायोजित)