यूपी में भाजपा का इतिहास: जनसंघ की 2 सीटों से 1991 के बहुमत और 2017 की 312 सीटों तक

वाराणसी में मार्च 2018 की जनसभा में मंच पर संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सामने बैठे लोग
Prime Minister's Office, भारत सरकार / Wikimedia Commons, लाइसेंस: GODL-India (12 मार्च 2018, वाराणसी में जनसभा)

संक्षेप में

  • चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1951 में जनसंघ ने यूपी में 2 और 1967 में 98 सीटें जीतीं।
  • भाजपा ने 1980 में 11 सीटें जीतीं; 1991 में 221 सीटों के साथ पहली बार बहुमत मिला।
  • से 2012 के बीच पार्टी 88 से घटकर 47 सीटों पर आ गई।
  • में भाजपा ने 312 और 2022 में 255 सीटें जीतीं; दोनों बार योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

यूपी में भाजपा का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। पार्टी और उससे पहले भारतीय जनसंघ ने यहां 2 सीटों से शुरुआत की। 1991 में भाजपा को पहली बार बहुमत मिला, फिर 2012 में वह 47 सीटों पर सिमट गई। 2017 में उसने 312 सीटें जीतीं। इस लेख में चुनाव आयोग के आंकड़ों के साथ यह सफर है।

जनसंघ का दौर

1951 के पहले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने यूपी में 2 सीटें जीतीं और उसे 6.45% वोट मिले। 1962 में उसकी सीटें बढ़कर 49 हो गईं। 1967 में जनसंघ ने 98 सीटें और 21.67% वोट हासिल किए।

1969 में उसे 49 और 1974 में 61 सीटें मिलीं। 1977 में जनसंघ जनता पार्टी में शामिल हो गया। उस चुनाव में जनता पार्टी ने 352 सीटें जीतकर सरकार बनाई।

भाजपा की शुरुआत और 1991 का बहुमत

1980 से यूपी में भाजपा का इतिहास नए नाम के साथ आगे बढ़ा। भाजपा बनने के बाद पहले विधानसभा चुनाव में उसे 11 सीटें और 10.76% वोट मिले। 1985 में 16 और 1989 में 57 सीटें आईं।

यूपी में भाजपा का इतिहास 1991 के चुनाव के बिना अधूरा है। राम मंदिर आंदोलन के दौर में यह चुनाव हुआ। तब यूपी में 425 सीटें थीं। भाजपा ने 221 सीटें और 31.45% वोट जीतकर पहली बार बहुमत हासिल किया। कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने। दिसंबर 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद यह सरकार चली गई।

1993 से 2002: सबसे बड़ा दल, पर सत्ता से दूर

1993 में भाजपा 177 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार सपा-बसपा गठबंधन ने बनाई। 1996 में उसे 174 सीटें मिलीं। 1997 से 2002 के बीच भाजपा के नेतृत्व में सरकारें बनीं। इस दौरान कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री रहे।

यूपी में भाजपा का इतिहास: गिरावट का दशक

2002 में भाजपा 88 सीटों और 20.08% वोट पर आ गई। 2007 में उसे 51 सीटें और 16.97% वोट मिले। 2012 में पार्टी सिर्फ 47 सीटें जीत सकी और उसका वोट शेयर 15.00% रहा। सीटों के लिहाज से यह 1985 के बाद उसका सबसे कमजोर प्रदर्शन था। इसी दौरान बसपा और सपा ने बारी-बारी से पूर्ण बहुमत की सरकारें बनाईं।

2014 के बाद नई ऊंचाई

2014 से यूपी में भाजपा का इतिहास नए दौर में पहुंचा। उस साल लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यूपी की 80 में से 71 सीटें जीतीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उसे 312 सीटें और 39.67% वोट मिले। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

2022 में भाजपा 255 सीटों के साथ फिर सत्ता में लौटी। उसका वोट शेयर बढ़कर 41.29% हो गया। ये आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 की रिपोर्ट में दर्ज हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 33 सीटों पर रही, जबकि सपा 37 सीटें जीत गई।

विश्लेषण: 2027 से पहले

यूपी में भाजपा का इतिहास एक पैटर्न भी दिखाता है। पार्टी को अपने दम पर बहुमत सिर्फ तीन बार मिला। ये चुनाव 1991, 2017 और 2022 के थे। इन तीनों चुनावों में उसका वोट शेयर 31% से ऊपर रहा। 2024 में लोकसभा सीटें घटने के बाद पार्टी के सामने 2027 में यह आधार बचाने की चुनौती है।

चुनाव की तैयारी पर हमारी रिपोर्ट यूपी भाजपा की नई मोर्चा टीमें पढ़ें। मुख्यमंत्री की हालिया दिल्ली यात्रा पर योगी-मोदी मुलाकात की रिपोर्ट भी देखें।

स्रोत

  1. ECI: Statistical Reports index (UP assembly elections 1951-2012)
  2. ECI: Uttar Pradesh General Legislative Election 2017 - Statistical Reports
  3. ECI: Uttar Pradesh General Legislative Election 2022 - Statistical Reports
  4. ECI: General Election to Lok Sabha 2024 - Statistical Reports
  5. Wikimedia Commons: PM Narendra Modi addressing a public meeting in Varanasi, 12 March 2018

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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