अपडेट (10 अक्टूबर 2026): यह लेख 3 अक्टूबर को, उम्मीदवारों की घोषणा से पहले लिखा गया था। अब नतीजा आ चुका है। 9 अक्टूबर को नाम वापसी की आखिरी तारीख पर उत्तर प्रदेश की सभी 10 राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें भाजपा के 8 और सपा के 2 सदस्य हैं। भाजपा ने अपने आठों उम्मीदवार नए उतारे: 3 ओबीसी (धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार), 2 दलित (विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत), 2 ब्राह्मण (राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय) और 1 ठाकुर (राम प्रताप सिंह चौहान)। स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, NDTV। पूरी खबर पढ़ें: यूपी राज्यसभा चुनाव: सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, भाजपा के 8 और सपा के 2 सदस्य पहुंचेंगे उच्च सदन
UP Rajya Sabha: उत्तर प्रदेश की दस राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह चुनाव दलों के लिए सामाजिक संतुलन साधने का अवसर माना जा रहा है। फिलहाल इन दस सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का एक-एक प्रतिनिधित्व है।
अधिसूचना 29 सितंबर को जारी हो चुकी है। नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है। उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक नाम वापस ले सकते हैं और मतदान 16 अक्टूबर को होना है। ऐसे में पार्टियों के अंदर उम्मीदवार चयन और सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज है।
UP Rajya Sabha: मौजूदा दस सांसदों का सामाजिक स्वरूप क्या है?
भारतीय जनता पार्टी के आठ सांसदों में दिनेश शर्मा और सीमा द्विवेदी ब्राह्मण समुदाय से हैं। नीरज शेखर और अरुण सिंह राजपूत-ठाकुर पृष्ठभूमि से आते हैं। बीएल वर्मा लोधी समुदाय से जुड़े हैं और गीता शाक्य अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। हरदीप पुरी सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि बृजलाल दलित समुदाय से हैं।
समाजवादी पार्टी की ओर से रामगोपाल यादव अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम दलित समुदाय से आते हैं। इस तरह मौजूदा बीजेपी कोटे में दो ब्राह्मण, दो राजपूत, दो ओबीसी, एक दलित और एक सिख सांसद शामिल हैं। बसपा के पास विधानसभा में कोई विधायक नहीं है, इसलिए रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी का यह प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा।
बीजेपी इस बार कौन सा जातीय फॉर्मूला अपना सकती है?
पार्टी ने अभी तक आधिकारिक नामों की घोषणा नहीं की है। संगठन सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि आठ में से कम से कम चार सीटों पर नए चेहरे उतारे जा सकते हैं। अंदरूनी स्तर पर ओबीसी और दलित चेहरों की संख्या बढ़ाने की चर्चा है। यह मौजूदा ढांचे से अलग संतुलन माना जा रहा है, जिसमें ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश दिख सकती है।
राज्यसभा चुनाव विधायकों के वोट से होता है। बीजेपी के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है, इसलिए आठ सीटें उसके लिए सुरक्षित मानी जा रही हैं। नामों का अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन की बैठकों के बाद ही सामने आएगा।
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UP Rajya Sabha: सपा ने किन दो नामों की घोषणा कर दी है?
समाजवादी पार्टी दो उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक कर चुकी है। इनमें रामगोपाल यादव का नाम दोहराया गया है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। दूसरा नाम धनराज नथवानी का है, जो वैश्य समुदाय से जुड़े बताए जाते हैं। पार्टी के पास मौजूदा विधायक संख्या के आधार पर दो सीटें जीतने की गणना की जा रही है।
कांग्रेस और अन्य दलों की ओर से अभी स्पष्ट उम्मीदवार सूची सामने नहीं आई है। गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव की समय-सीमा क्या है?
चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार नामांकन 6 अक्टूबर तक दाखिल किए जा सकते हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर है। मतदान 16 अक्टूबर को होगा। परिणाम उसी दिन या अगले दिन घोषित किए जा सकते हैं। नए सांसद नवंबर के अंत में कार्यकाल शुरू करेंगे, जब मौजूदा सदस्यों की अवधि पूरी हो जाएगी।
राज्यसभा चुनाव खुले मतपत्र (ओपन बैलट) से होता है। किसी दल का विधायक वोट डालने के बाद अपना मतपत्र अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाता है और फिर उसे मतपेटी में डालता है। मतदान वरीयता के आधार पर होता है, यानी विधायक उम्मीदवारों को पहली, दूसरी और आगे की वरीयता देते हैं। दल अपने विधायकों को बताते हैं कि किसे वोट देना है, और ओपन बैलट से पार्टी यह देख पाती है कि निर्देश माना गया या नहीं।
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UP Rajya Sabha: विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव क्यों अहम माना जा रहा है?
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की ये सीटें दलों के लिए संदेश देने का मौका हैं। उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि से पार्टियां विभिन्न समुदायों तक अपना रुख पहुंचाने की कोशिश करती हैं। ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और राजपूत समूहों का संतुलन लंबे समय से प्रदेश की राजनीति का हिस्सा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए चेहरों को जगह देने से संगठन में असंतोष कम करने का संकेत जा सकता है। वहीं अनुभवी सांसदों को दोहराने से सदन में निरंतरता बनी रहती है। अंतिम सूची आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन सा समीकरण जमीन पर उतरा।
फिलहाल सभी दल नामांकन प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। बीजेपी की ओर से आठ और सपा की ओर से दो नामों की पुष्टि के बाद ही पूरा चित्र साफ होगा।
फीचर्ड फोटो (फाइल): Glimpses of the new Parliament Building, in New Delhi (2).jpg, Ministry of Parliamentary Affairs, Wikimedia Commons, GODL-India लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।


