यूपी के छोटे दल अकेले सरकार नहीं बनाते, लेकिन कई सीटों पर नतीजा तय करते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद, अपना दल (एस), सुभासपा और निषाद पार्टी ने मिलकर 32 सीटें जीतीं। इस लेख में चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर इन चारों दलों का रिकॉर्ड है।
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद)
रालोद का आधार पश्चिमी यूपी में माना जाता है। 2002 में उसने सिर्फ 38 सीटों पर चुनाव लड़ा और 14 जीतीं। 2007 में वह 254 सीटों पर लड़ी, लेकिन 10 ही जीत पाई।
2012 में रालोद 46 सीटों पर लड़ी और 9 जीतीं। 2017 में उसने 277 उम्मीदवार उतारे, पर सिर्फ 1 सीट मिली। 2022 में वह सपा के साथ गठबंधन में 33 सीटों पर लड़ी और 8 जीतीं। तब लड़ी गई सीटों पर उसका वोट शेयर 33.88% रहा।
अपना दल (सोनेलाल)
अपना दल (एस) का रिकॉर्ड इन दलों में सबसे मजबूत रहा है। 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन में उसने 11 सीटों पर लड़कर 9 जीतीं। 2022 में वह 17 सीटों पर लड़ी और 12 जीतीं। इसके साथ वह विधानसभा में भाजपा और सपा के बाद तीसरा सबसे बड़ा दल बनी।
इससे पहले अविभाजित अपना दल 2002 में 227 सीटों पर लड़ा और 3 जीतीं। 2012 में वह 76 सीटों पर लड़ा और 1 सीट जीती। 2007 में उसे कोई सीट नहीं मिली।

सुभासपा और निषाद पार्टी
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2007 में 97 और 2012 में 52 सीटों पर अकेले लड़ी। दोनों बार उसे कोई सीट नहीं मिली। 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन में उसने 8 में से 4 सीटें जीतीं। 2022 में सपा के साथ गठबंधन में वह 19 सीटों पर लड़ी और 6 जीतीं।
निषाद पार्टी 2017 में 72 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 1 जीती। 2022 में भाजपा के साथ गठबंधन में वह 10 सीटों पर लड़ी और 6 जीतीं।
यूपी के छोटे दल और गठबंधन का गणित
आंकड़े एक साफ पैटर्न दिखाते हैं। यूपी के छोटे दल अकेले लड़ते हैं, तो ज्यादातर सीटों पर जमानत तक नहीं बचती। 2017 में निषाद पार्टी के 72 में से 70 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी।
बड़े दल के साथ गठबंधन में यही दल अच्छा स्ट्राइक रेट दिखाते हैं। 2022 में अपना दल (एस) ने 17 में से 12 और निषाद पार्टी ने 10 में से 6 सीटें जीतीं। माना जाता है कि यूपी के छोटे दल अपने जातीय या क्षेत्रीय आधार वाले वोट गठबंधन को दिलाते हैं।
पूरे प्रदेश में वोट शेयर
पूरे प्रदेश के हिसाब से यूपी के छोटे दल कम वोट शेयर वाले दिखते हैं। 2022 में रालोद को 2.85%, अपना दल (एस) को 1.62%, सुभासपा को 1.36% और निषाद पार्टी को 0.91% वोट मिले। लेकिन कड़े मुकाबले वाली सीटों पर इतना वोट भी नतीजा बदल सकता है। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।
2027 के लिए क्या मायने
2022 के बाद गठबंधनों की तस्वीर बदली है। रालोद और सुभासपा, जो 2022 में सपा के साथ थे, अब भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में हैं। इसलिए 2027 में यूपी के छोटे दल किस खेमे में रहते हैं, यह कई सीटों का गणित तय करेगा।
अपना दल (एस) पर हमारी रिपोर्ट स्थापना दिवस और स्वार टांडा रैली और NDA और सपा का सीट समीकरण भी देखें।


