यूपी विधानसभा चुनाव तैयारी निर्वाचन आयोग ने तेज कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग कर सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और एसएसपी को निर्देश दिए कि एक हफ्ते के अंदर सभी सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर तैनात कर दिए जाएं। इससे पहले वोटर लिस्ट सुधार और छूटे हुए वोटरों के नाम शामिल करने का अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए थे।
सेक्टर ऑफिसरों की तैनाती और ट्रेनिंग
रिणवा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार चुनाव से करीब 4 महीने पहले सेक्टर ऑफिसर और सेक्टर पुलिस ऑफिसर की तैनाती जरूरी है। जिम्मेदार और योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। नियुक्ति के बाद जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स के जरिए उन्हें ट्रेनिंग दी जाए। इससे पहले वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने का काम भी चल रहा है।
पोलिंग स्टेशनों पर सुविधाओं की जांच
मीटिंग में पोलिंग स्टेशनों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की समय पर जांच करने के निर्देश दिए गए। हर बूथ पर मोबाइल नेटवर्क की सुविधा होनी चाहिए। संवेदनशील पोलिंग स्टेशनों की लिस्ट समय पर तैयार की जाए। जिन बूथों पर मोबाइल नेटवर्क नहीं है, उनकी लिस्ट बनाकर टेलीकॉम कंपनियों की मदद से नेटवर्क उपलब्ध कराया जाए।
सेक्टर ऑफिसरों को अपने-अपने इलाके के पोलिंग स्टेशनों का दौरा करने, मतदान कर्मचारियों और वोटरों को मिलने वाली सुविधाओं की मौके पर जांच करने, पहुंचने वाली सड़क, बिजली, फर्नीचर, रैंप, शौचालय, छाया और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं की जांच करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपी जाएगी। कमी मिलने पर संबंधित विभागों से बात कर व्यवस्था पूरी कराई जाएगी।
ईवीएम और सुरक्षा संबंधी निर्देश
ईवीएम वेयरहाउस का हर महीने निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का कम से कम 30 दिनों का बैकअप रखना जरूरी बताया गया। वल्नरेबिलिटी मैपिंग से जुड़ा वीएम-1 फॉर्मेट समय पर सेक्टर अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाए। इसमें पिछले चुनावों के आपराधिक मामले, जातिगत हिंसा, आचार संहिता उल्लंघन, जब्ती और दोबारा मतदान जैसी जानकारियां दर्ज होती हैं।
क्रिटिकल पोलिंग स्टेशन और नेटवर्क
क्रिटिकल पोलिंग स्टेशनों की पहचान के लिए सेक्टर ऑफिसर की हैंडबुक में तय मानकों के आधार पर लिस्ट समय पर तैयार करने को कहा गया। मोबाइल नेटवर्क न आने वाले केंद्रों पर टेलीकॉम कंपनियों से संपर्क कर सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि मतदान के दौरान संचार संबंधी परेशानी न हो।
ये तैयारियां 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। पार्टियां अपनी तैयारी कर रही हैं, वहीं चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


