मोकामा के विधायक अनंत सिंह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाई है। यह कानूनी कार्रवाई दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ी है जो मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से याचिका दाखिल की गई थी जिस पर सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई की। अनंत सिंह पहले जदयू से जुड़े थे और बाद में पार्टी से निष्कासित बताए गए।
अनंत सिंह का राजनीतिक और विधायी परिचय
अनंत सिंह बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान वह पहले जदयू से जुड़े रहे थे। राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही उनका नाम विभिन्न कानूनी मामलों में भी चर्चा में रहा है। मोकामा क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव और उनकी उपस्थिति लंबे समय से राज्य के राजनीतिक गलियारों में ध्यान आकर्षित करती रही है।
विधायक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कई उतार चढ़ाव आए। पार्टी के साथ उनके संबंध में बदलाव आया और उन्हें बाद में जदयू से निष्कासित बताए गए। इसके बावजूद मोकामा के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रही है और उनके हर कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहती है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड और कानूनी प्रक्रिया
यह पूरा कानूनी विवाद दुलारचंद यादव हत्याकांड से संबंधित है। यह घटना 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हुई थी। इस घटना के बाद से ही पुलिस जांच और अदालत में कानूनी प्रक्रिया लगातार चल रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
इस मामले में दुलारचंद यादव के पोते की याचिका पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं जिसके बाद न्यायपालिका ने विभिन्न पहलुओं पर गौर किया। इस हत्याकांड ने मोकामा क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर भी बड़ी चर्चाओं को जन्म दिया था।
पटना हाईकोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
कानूनी प्रक्रिया के एक चरण में पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। इस जमानत आदेश के बाद मामला सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी पराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और हाईकोर्ट के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक के लिए निलंबित कर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों की संख्या और आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत का यह भी मानना था कि मामलों को सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बताना सही नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने जांच अधिकारी को चार महीने में अपनी जांच पूरी कर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए।
बेटी की शादी और सरेंडर से जुड़े निर्देश
कानूनी कार्यवाही के बीच विधायक की बेटी शिवांगी की शादी 25 नवंबर 2026 को तय थी। इसी पारिवारिक आयोजन को आधार बनाते हुए अदालत से मोहलत मांगी गई थी। इस संदर्भ में सरेंडर की समय सीमा पहले 1 दिसंबर 2026 बताई गई थी और बाद के लिखित आदेश तथा रिपोर्टिंग के अनुसार इसे 4 दिसंबर 2026 तक निर्धारित किया गया।
अदालत के इन निर्देशों के बाद इस प्रकरण में आगे की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम नवंबर 2026 के दौरान काफी चर्चा में रहा। अब जांच एजेंसी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी जांच पूरी करके अदालत में रिपोर्ट पेश करनी होगी जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
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स्रोत: सुप्रीम कोर्ट आदेश की रिपोर्टिंग: Times of India, The Indian Express, Live Hindustan (नवंबर 2026); The Indian Express
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