मोकामा से विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया। अदालत ने बिहार सरकार को जांच पूरी करने के लिए चार महीने का समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय होगी।
किसकी याचिका पर हुई सुनवाई
पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में यह तीसरी सुनवाई थी। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में अनंत सिंह पर दर्ज 62 मामलों का जिक्र किया। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड
दुलारचंद यादव की मौत 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव के दौरान मोकामा में हुई थी। इस मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और बेऊर जेल भेजा गया। 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी और 23 मार्च को वह जेल से बाहर आए। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें तय तारीख तक सरेंडर करना होगा।
जदयू से निष्कासन और राजनीतिक असर
एबीपी लाइव के मुताबिक, जदयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया है। उन पर जदयू के एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार का खुलकर समर्थन करने का आरोप था। निष्कासन के बाद उनका राज्य मंत्री का दर्जा भी खत्म हो गया और उन्हें 1 पोलो रोड स्थित आवास खाली करने का नोटिस दिया गया। हाल के विधान परिषद चुनावों के नतीजे यहां पढ़ें।
पहले भी कानूनी मामलों में घिरे रहे
अनंत सिंह का कानूनी मामलों से पुराना नाता रहा है। 2015 के पुटुस यादव मामले में वह जून 2015 से मार्च 2016 तक जेल में रहे। अगस्त 2019 में लदमा स्थित उनके घर से एके 47 बरामद हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की साकेत कोर्ट में सरेंडर किया। जून 2022 में इस मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया और 16 अगस्त 2024 को वह जेल से बाहर आए।
जनवरी 2025 में नौरंगा जलालपुर फायरिंग मामले में उन्होंने सरेंडर किया था। इस मामले में उन्हें अगस्त 2025 में जमानत मिली।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करना है। बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करनी है, जिसके बाद अदालत अगली सुनवाई करेगी। यह फैसला मोकामा और बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है। देश की राजनीति से जुड़ी और खबरें राष्ट्रीय राजनीति और ब्रेकिंग न्यूज़ सेक्शन में पढ़ें।
स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान, एबीपी लाइव
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