ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और वह 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। उनके करियर और मौजूदा विवाद की तथ्यात्मक रूपरेखा हाल ही में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से सामने आई है, जिसमें उनके पुराने कार्यकाल से जुड़े मामलों पर चर्चा की जा रही है। वर्तमान में वर्ष 2026 में कांग्रेस और विपक्ष द्वारा एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए जा रहे सवालों के बीच यह पुराना मामला फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है।
केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव के रूप में कार्यकाल
ज्ञानेश कुमार के करियर से जुड़े आरोप उनके केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव और केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहने के समय से जुड़े हैं। यह समय लगभग वर्ष 2006 का था, जब वह इन प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उस अवधि के दौरान विभिन्न प्रशासनिक कार्यों और परियोजनाओं का संचालन उनके विभाग के अंतर्गत आता था।
केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट विश्व बैंक सहायता प्राप्त सड़क परियोजना थी। इस परियोजना के तहत एमसी रोड, जो अंगमाली से तिरुवनंतपुरम तक जाती है, उसके अपग्रेडेशन का जिक्र रिपोर्टों में किया गया है। विश्व बैंक की सहायता से चलने वाली इस सड़क परियोजना में विभिन्न निर्माण कार्य और अनुबंध शामिल थे, जिनका प्रबंधन उस समय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा था।
रिश्वत के आरोपों और मलेशियाई इंजीनियर से जुड़ा मामला
रिपोर्टों के अनुसार यह मामला मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन से जुड़ा है, जो पाटी बेल कंसोर्टियम का हिस्सा थे। शिकायतकर्ता साजन ने लगभग दो करोड़ रुपये का आंकड़ा बताते हुए यह दावा किया था कि बिल क्लियर करने के लिए रिश्वत मांगी गई थी। इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की नवंबर 2006 में मलेशिया में आत्महत्या हो गई थी। हालांकि मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख मिलता है कि उनका कोई नोट सार्वजनिक नहीं हुआ था। इंजीनियर की मृत्यु के बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया और संबंधित पक्षों द्वारा इस पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा।
सरकार की कार्रवाई और मौजूदा जांच की स्थिति
तत्कालीन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सवादी सरकार ने दिसंबर 2006 में ज्ञानेश कुमार को लोक निर्माण विभाग के सचिव पद से हटा दिया था। पद से हटाने के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू की गई थी। प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए इस कदम के बाद मामले की आंतरिक और आधिकारिक समीक्षा की प्रक्रिया आरंभ हुई थी।
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को प्रारंभिक जांच की मंजूरी दी है, जिसका उल्लेख मीडिया रिपोर्टों में मिलता है। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग के मंत्री पीके बशीर ने विधानसभा में यह जानकारी दी थी कि इस मामले की प्रारंभिक जांच अभी चल रही है और इसकी रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
अक्टूबर 2026 की कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह बात भी सामने आई कि वर्ष 2007 की जांच में किसी तरह की प्रक्रियागत खामी नहीं पाई गई थी। इसके बावजूद एक नई शिकायत के आधार पर इस मामले में प्रारंभिक जांच वर्तमान में चल रही है। द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स और इकोनॉमिक टाइम्स की अक्टूबर तथा नवंबर 2026 की रिपोर्टों में इन सभी तथ्यों और घटनाक्रमों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
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स्रोत: The Hindu, The Indian Express, Hindustan Times, Economic Times (अक्टूबर-नवंबर 2026); The Indian Express
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