मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी को देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस कानूनी प्रकरण में राहत पाने के लिए याचिका दायर की गई है जिस पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले से जुड़े घटनाक्रम में निचली अदालत ने उन्हें चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया था। प्राधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित एक हजार एक सौ सत्तर करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को भी कुर्क किया है।
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई किए जाने से शीर्ष अदालत ने मना कर दिया है, लेकिन वकीलों के आग्रह पर अदालत ने इसी सप्ताह इस पर विचार करने की बात कही है। इस कानूनी कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और सभी पक्षों की निगाहें अदालत के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।
इस संपूर्ण घटनाक्रम में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है जिसके तहत यह कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई अमल में लाई गई है। निचली अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने त्वरित न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
कानूनी लड़ाई और आगे की प्रक्रिया
शीर्ष अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी जिसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि याचिका पर क्या निर्णय आता है। इस कानूनी मामले में और कौन से नए तथ्य सामने आते हैं, इस बारे में विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार है क्योंकि निचली अदालत के आदेश के बाद से लगातार नए कानूनी पेंच सामने आ रहे हैं।
स्थानीय अदालत के आदेश के अनुपालन में उन्हें जेल भेज दिया गया था और अब उच्च स्तर पर इस पूरी गिरफ्तारी की वैधता को परखा जा रहा है। जांच एजेंसी की ओर से संपत्तियां अटैच किए जाने के बाद से ही मामला और अधिक जटिल हो गया है जिस पर उच्च न्यायालय और अब सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई का सिलसिला चल रहा है।
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