यूपी की सबसे करीबी सीटें 2027 के चुनाव में सबसे ज्यादा ध्यान खींचेंगी। 2022 के विधानसभा चुनाव में 15 सीटों पर जीत का अंतर 1,000 वोट से भी कम रहा। इनमें 8 सीटें भाजपा, 6 सपा और 1 निषाद पार्टी ने जीतीं। इस लेख की सूची चुनाव आयोग की 2022 की विस्तृत नतीजों की रिपोर्ट से तैयार की गई है।
यूपी की सबसे करीबी सीटें: पूरी सूची
- धामपुर: भाजपा के अशोक कुमार राणा, 203 वोटों से
- कुर्सी: भाजपा के सकेंद्र प्रताप, 217 वोटों से
- चांदपुर: सपा के स्वामी ओमवेश, 234 वोटों से
- नहटौर: भाजपा के ओम कुमार, 258 वोटों से
- रामनगर: सपा के फरीद महफूज किदवई, 261 वोटों से
- इसौली: सपा के मोहम्मद ताहिर खान, 269 वोटों से
- बिलासपुर: भाजपा के बलदेव सिंह औलख, 307 वोटों से
- नकुड़: भाजपा के मुकेश चौधरी, 315 वोटों से
- बड़ौत: भाजपा के कृष्ण पाल मलिक, 315 वोटों से
- कटरा: भाजपा के वीर विक्रम सिंह, 357 वोटों से
- दिबियापुर: सपा के प्रदीप कुमार यादव, 473 वोटों से
- शाहगंज: निषाद पार्टी के रमेश, 719 वोटों से
- डुमरियागंज: सपा की सैयदा खातून, 771 वोटों से
- मुरादाबाद नगर: भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता, 782 वोटों से
- जसराना: सपा के सचिन यादव, 836 वोटों से
पश्चिमी यूपी में सबसे ज्यादा करीबी मुकाबले
यूपी की सबसे करीबी सीटें ज्यादातर पश्चिम में हैं। इन 15 में से 7 सीटें पश्चिमी यूपी के बिजनौर, सहारनपुर, बागपत, रामपुर और मुरादाबाद जिलों में हैं। बिजनौर जिले की तीन सीटें, धामपुर, चांदपुर और नहटौर, इस सूची में हैं। नहटौर और बड़ौत में भाजपा का मुकाबला रालोद से था। बाकी ज्यादातर सीटों पर मुकाबला भाजपा और सपा के बीच रहा।
अवध क्षेत्र में भी यूपी की सबसे करीबी सीटें मिलती हैं। बाराबंकी जिले की दो सीटें, कुर्सी और रामनगर, भी सूची में हैं। कुर्सी भाजपा ने जीती और रामनगर सपा ने। यानी एक ही जिले में दोनों दल बहुत कम अंतर से जीते।
5,000 से कम अंतर वाली सीटें
आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार 2022 में 53 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 वोट से कम रहा। यानी करीब हर आठ में से एक सीट का फैसला बहुत करीबी रहा। सुल्तानपुर सीट पर अंतर 1,009 वोट था, जो सूची से बस थोड़ा ऊपर रहा। इसका इतिहास सुल्तानपुर सीट लेख में है।
NOTA और छोटे दलों का असर
यूपी की सबसे करीबी सीटें दिखाती हैं कि छोटा सा वोट भी नतीजा बदल सकता है। धामपुर में NOTA को 834 वोट मिले, जो जीत के अंतर से चार गुना से ज्यादा था। कुर्सी में NOTA को 1,723 वोट मिले। ऐसे में बसपा, AIMIM या किसी निर्दलीय को मिले कुछ हजार वोट भी नतीजे को प्रभावित करते हैं। NOTA पर विस्तार से NOTA क्या है लेख में है।
विश्लेषण: 2027 में क्या मायने
2022 में भाजपा गठबंधन को 273 सीटें मिली थीं, जबकि बहुमत 202 का है। लेकिन करीबी सीटों की संख्या बताती है कि कुछ प्रतिशत वोट का बदलाव सीटों में बड़ा फर्क ला सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा और भाजपा के बीच वोट का अंतर घटा था। इसलिए 2027 में यूपी की सबसे करीबी सीटें दोनों दलों की रणनीति के केंद्र में रहेंगी। उम्मीदवार चयन और बूथ प्रबंधन यहां सबसे अहम होगा। आंकड़े चुनाव आयोग की रिपोर्ट में देखे जा सकते हैं।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के विस्तृत नतीजे और सफल उम्मीदवारों की सूची।


