विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजनीति

बिहार में निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर विवाद

बिहार में निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर विवाद, आरजेडी और जेएसपी ने की अयोग्यता की मांग

बिहार में निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर विवाद
ग्राफिक: UP Election News

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार में दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने के मामले पर राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी ने इन दोनों सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की मांग उठाई है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और इस विषय पर विभिन्न दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब भारतीय जनता पार्टी की तरफ से एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। उस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। भाजपा के इस दावे के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करना शुरू कर दिया और फौरन कार्रवाई की मांग की।

विज्ञापन

जब इस विषय पर चारों तरफ राजनीतिक हलचल बढ़ी और विवाद तूल पकड़ने लगा, तो संबंधित दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने मीडिया के सामने आकर स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि वे केवल उस पार्टी को अपना समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद मामले की स्थिति कुछ हद तक बदली है लेकिन विरोधी दलों का रुख अब भी सख्त बना हुआ है।

इस मामले से जुड़ी अन्य प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में अभी तक विस्तृत जानकारी का इंतजार है। चुनाव आयोग या संबंधित विधायी प्राधिकारियों की तरफ से इस संबंध में क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी आधिकारिक पुष्टि आने वाले समय में हो सकेगी। विधान परिषद के सभापति के कार्यालय से इस पर क्या निर्णय आएगा, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

दलों की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी का तर्क है कि यदि निर्दलीय सदस्य किसी राजनीतिक दल के साथ इस तरह जुड़ते हैं या समर्थन देते हैं, तो नियमों के तहत उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। विरोधी दलों के नेताओं का मानना है कि इस तरह के कदमों से दलबदल विरोधी कानूनों की भावना प्रभावित होती है।

विज्ञापन

दूसरी तरफ, शासक दल और संबंधित सदस्यों के बयानों के बाद इस पूरे मामले के कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सदन के नियमों के दायरे में रहकर ही आगे के कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस घटनाक्रम के कारण राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने के आसार हैं।

यह भी पढ़ें:

स्रोत: द हिंदू

विज्ञापन

और पढ़ें: आपके लिए चुनी गई ख़बरें → (प्रायोजित)

विज्ञापन
विज्ञापन