Bihar Politics: बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज को बड़ा झटका लगा है। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी बनाए गए शिक्षक नेता भूषण झा ने 24 घंटे के अंदर पार्टी छोड़ दी। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
यह घटना मुजफ्फरपुर की बैठक के बाद हुई। बैठक में खुद प्रशांत किशोर मौजूद थे। भूषण झा ने आरोप लगाया कि उनकी बात नहीं सुनी गई और साथी शिक्षकों को रिकॉर्डिंग से रोका गया। जन सुराज अब शनिवार को नए प्रत्याशी का नाम घोषित करेगी। तिरहुत टीचर्स सीट फिलहाल खाली हो गई है।
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| पार्टी | जन सुराज |
| नेता | भूषण झा |
| सीट | तिरहुत टीचर्स |
| समय | प्रत्याशी बनने के 24 घंटे बाद इस्तीफा |
| आगे की योजना | निर्दलीय चुनाव |
| मतदान | 23 अक्टूबर, गिनती 27 अक्टूबर |
Bihar Politics: भूषण झा ने पार्टी क्यों छोड़ी?
भूषण झा ने जन सुराज छोड़ते हुए बैठक के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि समीक्षा बैठक में जब वे अपनी बात रख रहे थे, साथी शिक्षकों को रिकॉर्डिंग करने से रोक दिया गया। उन्हें पार्टी की तय लाइन बोलने को मजबूर किया गया। यह बात उन्हें आपत्तिजनक लगी।
उन्होंने कहा कि साथी शिक्षकों के सुझाव पर उन्होंने पार्टी छोड़कर निर्दलीय लड़ने का फैसला किया। यानी विवाद सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, समर्थक शिक्षकों के समूह से जुड़ा बताया जा रहा है। जन सुराज की ओर से इन आरोपों का विस्तृत जवाब तत्काल सामने नहीं आया। पार्टी नए चेहरे की घोषणा कर नुकसान संभालना चाहती है।
बैठक कहां हुई और उसमें क्या हुआ?
बैठक 25 सितंबर को मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर स्थित एक होटल में हुई। प्रशांत किशोर स्वयं मौजूद थे। तिरहुत शिक्षक क्षेत्र के प्रचार और संगठन पर यही बैठक मानी जा रही है। इसके तुरंत बाद भूषण झा मैदान से बाहर हो गए।
उनका कहना है कि बैठक में उनके और समर्थक शिक्षकों के साथ व्यवहार ठीक नहीं था। रिकॉर्डिंग रोकने और तैयार बयान बुलवाने का आरोप इसी बैठक से जुड़ा है। प्रशांत किशोर की मौजूदगी में ऐसा विवाद होना पार्टी के लिए और नाजुक है। नई पार्टी में अनुशासन और नेताओं की बात सुनने का संतुलन अक्सर चर्चा का विषय बनता है। यह घटना उसी परीक्षा जैसी लगती है।
Bihar Politics: विधान परिषद चुनाव की तारीखें क्या हैं?
बिहार विधान परिषद की इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को तय है। जन सुराज ने गुरुवार को आठ में से तीन सीटों के प्रत्याशी घोषित किए थे। बाकी पांच सीटों के नाम 20 सितंबर को ही आ चुके थे। तिरहुत टीचर्स उन्हीं सीटों में है जहां अब उम्मीदवार बदलना पड़ेगा।
समय कम है। नामांकन और प्रचार की प्रक्रिया चल रही है। 24 घंटे में प्रत्याशी बदलना संगठन के लिए चुनौती है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता शिक्षक होते हैं। इसलिए चेहरा और शिक्षक संगठनों का विश्वास दोनों मायने रखते हैं। भूषण झा शिक्षक नेता हैं। निर्दलीय लड़ने पर वे उसी वोट पर अपनी पुरानी पहचान से दावा कर सकते हैं।
जन सुराज ने किन सीटों पर किसे उतारा है?
पार्टी की घोषित सूची इस प्रकार है। पटना ग्रेजुएट्स पर अनुज सिंह हैं। पटना टीचर्स पर दिव्या ज्योति हैं। तिरहुत ग्रेजुएट्स पर विमोहन कुमार हैं। तिरहुत टीचर्स भूषण झा के इस्तीफे के बाद खाली है। दरभंगा ग्रेजुएट्स पर रवींद्र यादव हैं। दरभंगा टीचर्स पर एसपी राय हैं। कोसी ग्रेजुएट्स पर रजनीश रंजन हैं। सारण टीचर्स पर अफाक अहमद हैं।
आठ सीटों में शिक्षकों और स्नातकों दोनों क्षेत्र शामिल हैं। जन सुराज बिहार में नई ताकत बनने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव के बाद यह परिषद चुनाव संगठन जांचने का मौका है। ऐसे में एक प्रमुख शिक्षक सीट का प्रत्याशी 24 घंटे में पार्टी छोड़ दे तो संदेश नकारात्मक जाता है। इसलिए नया नाम जितनी जल्दी आएगा, उतना नुकसान सीमित हो सकता है।
Bihar Politics: प्रशांत किशोर के लिए यह झटका कितना बड़ा है?
राजनीतिक रूप से यह छोटी घटना नहीं है। प्रत्याशी घोषणा के एक दिन बाद बागी हो जाना पार्टी की आंतरिक पकड़ पर सवाल खड़ा करता है। भूषण झा के आरोप बैठक की शैली पर हैं। अगर शिक्षक समर्थक उनके साथ रहे तो तिरहुत सीट पर वोट बंट सकते हैं। जन सुराज का नया प्रत्याशी दोहरी लड़ाई लड़ेगा। एक तरफ पुराने दलों से, दूसरी तरफ अपने ही घोषित चेहरे से।
प्रशांत किशोर की राजनीति संगठन और संदेश दोनों पर टिकी है। बैठक में उनकी मौजूदगी के बावजूद यह बंटवारा हुआ। पार्टी को अब आरोपों का जवाब देना होगा या चुपचाप नया चेहरा उतारकर आगे बढ़ना होगा। भूषण झा निर्दलीय मैदान में हैं। जन सुराज शनिवार को नाम घोषित करेगी। तिरहुत के शिक्षक मतदाता तय करेंगे कि 24 घंटे वाले इस मोड़ का असर कितना गहरा है।
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