CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। स्वेच्छा से इस्तीफा न दें तो वे इसी अवधि तक पद पर रहेंगे। लोकसभा चुनाव 2029 की घोषणा से कुछ महीने पहले सेवानिवृत्ति की स्थिति बनती है। सरकार कार्यकाल बढ़ाए तभी वे उस आम चुनाव की प्रक्रिया भी देख सकते हैं। 19 फरवरी 2025 को उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था। विपक्ष इन दिनों इस्तीफे की मांग कर रहा है और महाभियोग की बात भी कर रहा है, पर कानून में हटाने का रास्ता संसद से होकर जाता है।
CEC Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त कब बने और पहले कहां थे?
ज्ञानेश कुमार जनवरी 2024 में सिविल सर्विस से रिटायर हुए थे। दो महीने से भी कम समय बाद उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने से एक दिन पहले हुई थी। फरवरी 2025 में वे मुख्य चुनाव आयुक्त बने। नौकरशाही में उनका समय 36 साल से अधिक बताया जाता है। चुनाव आयोग से पहले राज्य और केंद्र के कई पदों पर काम कर चुके हैं। मौजूदा कार्यकाल की गिनती फरवरी 2025 के पदभार से जनवरी 2029 तक जुड़ती है।
कार्यकाल में कितने विधानसभा और राष्ट्रपति चुनाव आ सकते हैं?
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनके सामने कम से कम 22 विधानसभा चुनाव आने की बात कही गई है। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और गुजरात शामिल हैं। 2027 में राष्ट्रपति का चुनाव भी उनके कार्यकाल में पड़ता है। बिहार, दिल्ली और बंगाल के चुनाव उनके नेतृत्व में संपन्न हो चुके हैं। आगे की सूची साल के हिसाब से बंटी है। मौजूदा कार्यकाल जनवरी 2029 में पूरा होता है, इसलिए 2029 के कुछ विधानसभा चुनाव अवधि के आखिरी हिस्से में आ सकते हैं।
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2027, 2028 और 2029 में किन राज्यों के चुनाव प्रस्तावित हैं?
साल 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 2028 में नौ राज्यों की सूची है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, कर्नाटक, मिजोरम और छत्तीसगढ़। 2029 में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के चुनाव प्रस्तावित बताए गए हैं। तारीखें आयोग के कार्यक्रम से अंतिम होती हैं। साल की सूची अनुमानित चक्र है, अधिसूचना नहीं।
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इस्तीफा या महाभियोग बिना कार्यकाल कैसे खत्म हो सकता है?
भारतीय कानून के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट नहीं हटा सकता। विपक्ष अकेले भी नहीं हटा सकता। हटाने का रास्ता संसद के महाभियोग प्रस्ताव से जाता है। प्रस्ताव के लिए दो तिहाई सांसदों की सहमति जरूरी बताई गई है। विपक्ष अपने संख्याबल से ऐसा प्रस्ताव पारित नहीं करा सकता। मुख्य चुनाव आयुक्त चाहें तो स्वेच्छा से इस्तीफा दे सकते हैं। इस्तीफा न हो और महाभियोग सफल न हो तो जनवरी 2029 वाली अवधि बनी रहती है। इन दिनों एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष निशाने पर रखे हुए है। विरोध मार्च और संसद में प्रस्ताव की तैयारी की खबरें आ रही हैं। मांग और हटाने की कानूनी शर्त अलग चीजें हैं।
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लोकसभा 2029 उनके कार्यकाल में आएगा या नहीं?
मौजूदा अवधि लोकसभा चुनाव 2029 की घोषणा से कुछ महीने पहले पूरी होती है। सामान्य चक्र पर वे उस आम चुनाव की अधिसूचना नहीं देखेंगे। सरकार कार्यकाल आगे बढ़ाए तो स्थिति बदल सकती है। विस्तार अलग फैसला होगा। अभी आधिकारिक स्थिति जनवरी 2029 तक के कार्यकाल की है। विधानसभा चक्र 2027 और 2028 उनके सामने साफ पड़ता है। 2029 के राज्य चुनाव अवधि के किनारे पर हैं।
ज्ञानेश कुमार का पद फरवरी 2025 से जनवरी 2029 तक जुड़ा है। बीच में इस्तीफा या संसद का सफल महाभियोग ही इस अवधि को छोटा कर सकता है। राज्यवार सूची प्रस्तावित चक्र है। अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की अधिसूचना से ही मान्य होगा।
फीचर्ड फोटो (फाइल): Election Commissioner Shri Gyanesh Kumar.jpg, Election Commission of India, Wikimedia Commons, GODL-India लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।


