SIR पर योगी का कांग्रेस पर हमला, बोले- संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल बंद करो, माफी मांगो

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
फाइल फोटो: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। फोटो: President's Secretariat / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप/रीसाइज़ किया गया)

संक्षेप में

  • CM Yogi: लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर को लेकर कांग्रेस और सहयोगी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया और माफी की मांग की। योगी ने वोटर सूची के विशेष पुनरीक्षण को पुरानी प्रक्रिया बताया।

CM Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कांग्रेस और सहयोगी विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए विपक्ष चुनाव आयोग समेत संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। उनके मुताबिक एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। पहले भी वोटर सूची के विशेष संशोधन हो चुके हैं।

योगी ने कहा कि कांग्रेस जब सत्ता में थी तब भी ऐसे संशोधन कराए गए। हार के बाद आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने विपक्ष से माफी मांगने को कहा। लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और गलत प्रचार की जगह नहीं होनी चाहिए, यह भी उन्होंने दोहराया। ये मुख्यमंत्री के आरोप हैं। कांग्रेस इन्हें सत्ता का बचाव बता सकती है।

विषय योगी आदित्यनाथ का बयान
एसआईआर पुरानी प्रक्रिया, 1952 से होती रही
विपक्ष पर आरोप हार पर आयोग-ईवीएम को दोष
मांग कांग्रेस और सहयोगी माफी मांगें
फॉर्म-6 छूटे वोटर नाम जुड़वा सकते हैं
चेतावनी कार्यालयों पर तोड़फोड़ लोकतंत्र में गलत

योगी ने एसआईआर को पुरानी प्रक्रिया क्यों बताया?

मुख्यमंत्री का दावा है कि देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी वोटर सूची के विशेष संशोधन हुए। कांग्रेस उन दिनों सत्ता में रही तो उसने भी ऐसी प्रक्रिया कराई। इसलिए आज एसआईआर को संदिग्ध बताना दोहरा रवैया है। उनका तर्क है कि सूची साफ रखना चुनाव व्यवस्था का हिस्सा है। नया सिर्फ विवाद का शोर है।

विपक्ष कहता रहा है कि मौजूदा एसआईआर का पैमाना और अमल अलग है। बड़ी संख्या में नाम कटने और नोटिस का तरीका सवाल पैदा करता है। योगी उस बहस को इतिहास से काटते दिखे। पुरानी प्रक्रिया का हवाला देकर वे कांग्रेस को उसी रास्ते पर खड़ा करना चाहते हैं जो आज वे चलाने का आरोप लगा रही है। दोनों तरफ के दावे राजनीतिक हैं। आयोग के आंकड़े और अदालती आदेश ही बीच की सच्चाई खोल सकते हैं।

CM Yogi: हार के बाद आयोग पर सवाल वाले तर्क का मतलब क्या है?

योगी ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या राजद जब चुनाव जीतते हैं तो मेहनत का श्रेय लेते हैं। हारते हैं तो आयोग या ईवीएम को दोष देते हैं। आत्ममंथन होना चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका, सीएजी और ईवीएम से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरा रवैया बताया।

यह भाजपा की राष्ट्रीय लाइन से मिलता है। नितिन नवीन भी केरल-तमिलनाडु का उदाहरण दे चुके हैं। जीत वैध, हार में मशीन खराब। विपक्ष कहता है कि सवाल नतीजे का नहीं, प्रक्रिया का है। योगी ने 1975 की आपातकाल का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस पर संविधान और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का पुराना आरोप दोहराया। बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों पर विपक्षी सवालों को सैनिकों के साहस पर सवाल बताया। एसआईआर की बहस को राष्ट्र और सेना तक खींचना राजनीतिक विस्तार है। मुद्दा वोटर सूची का है। तुलना कितनी सटीक है, यह पाठक तय करेंगे।

फॉर्म-6 और आयोग की सफाई को कैसे जोड़ा गया?

योगी ने कहा कि चुनाव आयोग स्थिति साफ कर चुका है। तीनों आयुक्तों ने प्रक्रिया की जानकारी दी। जिन वोटरों का नाम छूटा है उन्हें फॉर्म भरने की छूट है। फॉर्म-6 से नाम जुड़ सकता है। इसके बावजूद विपक्ष आयोग को निशाना बना रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस को गैर जिम्मेदार हरकतें रोकनी चाहिए। चुनाव कार्यालयों पर प्रदर्शन और तोड़फोड़ गलत है।

आयोग ने हाल की बैठक में बीएलओ के घर जाने, दिल्ली-महाराष्ट्र में तारीख बढ़ाने और ऑनलाइन सुनवाई जैसे फैसले लिए हैं। योगी इन्हीं कदमों को पर्याप्त बता रहे हैं। विपक्ष कहेगा कि राहत कागजी है, कटौती का पैमाना नहीं बदला। लखनऊ प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने एक्स पर भी लिंक साझा किया। संदेश एक है। प्रक्रिया खुली है, विरोध संस्था तोड़ना है।

CM Yogi: माफी वाली मांग का राजनीतिक मतलब क्या है?

अंत में योगी ने कांग्रेस और सहयोगियों से देश और जनता से माफी मांगने को कहा। चुनावी व्यवस्था पर लगातार संदेह पैदा करना संस्थाओं के लिए नुकसानदायक है। एसआईआर विरोध को लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर करने की कोशिश बताया गया। यूपी में 2027 चुनाव करीब है। मुख्यमंत्री का हमला उसी मैदान की तैयारी भी लगता है।

कांग्रेस राहुल गांधी के जरिए वोट चोरी और आयोग की स्वतंत्रता का मुद्दा चला रही है। योगी उसे हार का बहाना बता रहे हैं। दोनों कथाएं आमने-सामने हैं। एक में एसआईआर सफाई है। दूसरी में एसआईआर संदेह है। माफी की मांग दबाव की भाषा है, कानूनी फैसला नहीं। आयोग के आंकड़े, अदालत और मतदाता अनुभव के बीच यह घमासान चलता रहेगा। फिलहाल लखनऊ से योगी का संदेश साफ है। संस्थाओं पर हमला बंद करो। नाम छूटा है तो फॉर्म भरो। कांग्रेस माफी मांगे। विपक्ष इसे चुनौती मानेगा, स्वीकार नहीं।

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फीचर्ड फोटो (फाइल): The Uttar Pradesh Chief Minister, Shri Yogi Adityanath in New Delhi on February 10, 2018 (cropped).jpg, President's Secretariat, Wikimedia Commons, GODL-India लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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