मोकामा क्षेत्र में हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस मामले में मोकामा के विधायक अनंत सिंह आरोपी हैं और घटना 30 अक्टूबर 2025 की है। पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को जमानत दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया है। बेटी की शादी के लिए सरेंडर की समय सीमा पहले 1 दिसंबर 2026 बताई गई थी और बाद में लिखित आदेश तथा रिपोर्टिंग के अनुसार 4 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई थी। पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड और कानूनी पृष्ठभूमि
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 30 अक्टूबर 2025 को दुलारचंद यादव हत्याकांड की घटना सार्वजनिक रूप से सामने आई थी। इस मामले में मोकामा के विधायक अनंत सिंह आरोपी हैं। विधायक अनंत सिंह पहले जदयू से जुड़े थे और बाद में पार्टी से निष्कासित बताए गए थे। इस गंभीर मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई विभिन्न स्तरों पर चर्चा का विषय बनी रही है।
घटना के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को आरोपी को जमानत दे दी थी। इस जमानत आदेश के खिलाफ पीड़ित पक्ष यानी दुलारचंद यादव के पोते की याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और जमानत पर रोक
पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी पराले शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों की संख्या और आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन मामलों को सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बताना सही नहीं है।
बेटी की शादी और सरेंडर की समय सीमा
विधायक अनंत सिंह की बेटी शिवांगी की शादी 25 नवंबर 2026 को तय थी। इसी शादी के कार्यक्रम को आधार बनाकर अदालत से मोहलत मांगी गई थी।
शुरुआती रिपोर्टिंग में सरेंडर की समय सीमा 1 दिसंबर 2026 बताई गई थी, जिसे बाद के लिखित आदेश और रिपोर्टिंग के अनुसार 4 दिसंबर 2026 तक निर्धारित किया गया।
जांच और पूरक आरोपपत्र के निर्देश
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने जांच अधिकारी को चार महीने की अवधि के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारी को अदालत में पूरक आरोपपत्र दाखिल करने को कहा गया है। यह पूरा घटनाक्रम नवंबर 2026 के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग के माध्यम से सामने आया था।
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स्रोत: सुप्रीम कोर्ट आदेश की रिपोर्टिंग: Times of India, The Indian Express, Live Hindustan (नवंबर 2026); The Indian Express
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