मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर बुधवार को दिल्ली में विपक्ष सड़क पर तो उतरा, लेकिन एक साथ नहीं। CEC के खिलाफ गुस्सा सबका एक जैसा था, फिर भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आपस में ही उलझ गईं। बहस इस पर छिड़ी कि आंदोलन में कौन पहले उतरा, कौन पीछे रहा और किसे किसके साथ खड़ा होना चाहिए था।
तस्वीर कुछ ऐसी थी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जंतर-मंतर पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस से जूझ रहे थे। उधर कश्मीरी गेट पर AAP कार्यकर्ता दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के बाहर डटे थे और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगा रहे थे। मांग दोनों जगह एक थी, बस झंडे और मंच अलग थे।
कश्मीरी गेट पर AAP का धरना, कमान सौरभ भारद्वाज के हाथ
कश्मीरी गेट वाले धरने की कमान AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के हाथ में थी। पार्टी ने बताया कि विधायक संजीव झा, जरनैल सिंह और कुलदीप कुमार भी वहां थे और दिल्ली भर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगते रहे और पुलिस ने CEO दफ्तर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए एक के पीछे एक कई बैरिकेड लगा दिए थे।
पार्टी की मांग साफ है। SIR (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) में दिल्ली के जिन लोगों के नाम कट गए, उन्हें वापस जोड़ा जाए। भारद्वाज कहते हैं कि लाखों वोटर सूची से बाहर कर दिए गए हैं, और AAP तो यहां तक कहती है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में भी यही खेल हुआ था। धरने पर उनकी एक शिकायत यह भी थी कि CEO से मिलने के लिए पुलिस ने बस तीन लोगों को भीतर जाने की इजाजत दी।
साथी दल नहीं आए, AAP को खटका
भारद्वाज को इस बात का भी मलाल दिखा कि INDIA गठबंधन के बाकी दलों को AAP के प्रदर्शन में आने का न्योता गया था, फिर भी उनमें से कोई नहीं पहुंचा। उनके हिसाब से ये गलत है, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तो सबको एक साथ सड़क पर होना चाहिए। वैसे PTI से बातचीत में उन्होंने यह भी बताया था कि हफ्ता भर पहले वाम दलों ने AAP को बुलाया था और केजरीवाल ने हां कह दी थी।
देवेंद्र यादव का तंज, खरगे तक पहुंची शिकायत
असली तकरार धरने से पहले ही सोशल मीडिया पर शुरू हो चुकी थी। AAP ने जैसे ही CEO दफ्तर के बाहर प्रदर्शन का ऐलान किया, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भारद्वाज को टैग कर सवाल दाग दिए। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार यादव ने पूछा कि AAP न INDIA की बैठक में आई, न एक दिन पहले के प्रदर्शन में, तो अब हृदय परिवर्तन कैसे हुआ। उन्होंने यह भी कुरेदा कि कहीं राहुल और प्रियंका गांधी को मिला समर्थन देखकर तो INDIA की याद नहीं आई। पोस्ट का आखिरी सवाल सीधा था, “आप हैं किधर? विपक्ष के साथ या भाजपा के?”
भारद्वाज चुप नहीं बैठे। उन्होंने यादव को जवाब देने के बजाय सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा, कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष कुछ ज्यादा ही रिएक्ट कर रहे हैं। साथ में याद दिलाया कि AAP और उसका छात्र संगठन ASAP तो 2, 3 और 4 अक्टूबर को भी सड़क पर थे। खरगे से उन्होंने दखल देने को कहा और आरोप लगाया कि यादव अनजाने में भाजपा और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रहे हैं। धरने पर पहुंचकर भी उन्होंने कांग्रेस को दिल बड़ा करने की सलाह दे डाली।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: जंतर-मंतर से पहले रोके गए राहुल-प्रियंका
इसी दिन INDIA गठबंधन के सांसद खरगे के जनपथ पर दिए लंच के बाद बसों से जंतर-मंतर के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें विंडसर प्लेस के पास रोक दिया, जो धरनास्थल से करीब 900 मीटर दूर है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को लगातार दूसरे दिन हिरासत में लिया गया। राहुल को बाराखंभा रोड थाने ले जाया गया और शाम को छोड़ दिया गया।
हिरासत के बाद राहुल ने दोहराया कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, विरोध नहीं रुकेगा। यह रुख नया नहीं है; वे पहले भी CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग कर चुके हैं।
मंगलवार के मार्च में क्यों नहीं दिखी AAP?
दरअसल कांग्रेस को खटक रहा है मंगलवार का मार्च। उस दिन INDIA के सांसद ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय की तरफ बढ़े थे और AAP का कोई सांसद साथ नहीं था। संजय सिंह ने तब कहा था कि पार्टी अपनी लड़ाई अपने ढंग से लड़ रही है। यह मार्च 30 सितंबर की बैठक के बाद घोषित हुआ था (INDIA गठबंधन की प्रदर्शन रणनीति पर हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें)। और हां, किनारा करने वालों में AAP अकेली नहीं थी, ओवैसी ने भी INDIA के मार्च से दूरी बना ली थी।
इस पूरे झगड़े में पंजाब का एंगल भी जुड़ गया है। कुछ ही दिन पहले AAP छोड़कर कांग्रेस में गईं प्रियंका कक्कड़ मानती हैं कि पंजाब चुनाव ही वह वजह हो सकती है, जो AAP को ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे पूरे विपक्ष के साथ खड़े होने से रोक रही है। पंजाब में दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं, ये सब जानते हैं। AAP ने अपनी तरफ से ऐसी कोई वजह नहीं मानी है। 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों ने दिल्ली में मिलकर लड़ा था, पर विधानसभा चुनाव आते-आते रास्ते जुदा हो गए।
SIR पर आयोग क्या कहता है
विपक्ष कह रहा है कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण में बड़ी गड़बड़ी हुई है और इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है। चुनाव आयोग ये आरोप मानने को तैयार नहीं। तीन सदस्यों वाले आयोग में फूट की खबरें भी उसने खारिज की हैं, और उसका कहना है कि SIR पर फैसले सबकी सहमति से हुए।
अब 10 अक्टूबर का इंतजार
अब निगाहें 10 अक्टूबर पर हैं। उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कॉल दी है, और भारद्वाज का दावा है कि देशभर से लोग वहां पहुंचेंगे। देखना होगा कि AAP और कांग्रेस वहां एक साथ नजर आती हैं, या ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर क्रेडिट की ये खींचतान विपक्ष की दरार को और गहरा कर देती है।
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