कानपुर कैंट विधानसभा सीट: सतीश महाना की पांच जीत, फिर कांग्रेस और 2022 में सपा

कानपुर छावनी इलाके में स्थित ऐतिहासिक मेमोरियल चर्च (ऑल सोल्स चर्च) की इमारत
Shivam Maini / Wikimedia Commons, लाइसेंस: CC BY-SA 4.0

संक्षेप में

  • सतीश महाना ने 1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 में यह सीट भाजपा के लिए जीती।
  • में भाजपा के रघुनंदन सिंह 9,308 वोटों से जीते।
  • में कांग्रेस के सोहिल अख्तर अंसारी 9,364 वोटों से जीते।
  • में सपा के मोहम्मद हसन रूमी 19,987 वोटों से जीते।

कानपुर कैंट विधानसभा सीट प्रदेश की उन शहरी सीटों में है, जहां पिछले चार चुनावों में तीन अलग दल जीते। 1991 से 2007 तक यहां भाजपा का कब्जा रहा। इसके बाद 2012 में भाजपा, 2017 में कांग्रेस और 2022 में सपा जीती। इस लेख के आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टों से हैं।

शुरुआती दौर

आयोग के रिकॉर्ड में यह सीट 1967 से कानपुर कैंटोनमेंट के नाम से दर्ज है। 1967 में कांग्रेस के डी.एस. बाजपेयी जीते। 1969 में भारतीय क्रांति दल के मनोहर लाल जीते। 1974 में कांग्रेस के श्याम मिश्रा और 1977 में जनता पार्टी के बाबू राम शुक्ला विधायक बने।

1980 और 1985 में यह सीट फिर कांग्रेस के पास गई। 1989 में जनता दल के गणेश दीक्षित जीते।

सतीश महाना का दौर

1991 में भाजपा के सतीश महाना ने यह सीट जीती। उन्हें 33,897 वोट (44.60%) मिले। कांग्रेस के श्याम मिश्रा 23.59% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। अंतर 15,970 वोट रहा।

इसके बाद महाना 1993, 1996, 2002 और 2007 में भी जीते। यानी लगातार पांच चुनावों में कानपुर कैंट विधानसभा सीट भाजपा के पास रही। 2008 के परिसीमन के बाद महाना महाराजपुर सीट से लड़े। आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, वे 2017 और 2022 में वहां से जीते।

परिसीमन के बाद के चुनाव

परिसीमन के बाद इस सीट का क्रमांक 216 है। 2012 में भाजपा के रघुनंदन सिंह को 42,551 वोट (29.48%) मिले। सपा के मोहम्मद हसन रूमी को 33,243 वोट (23.03%) मिले। अंतर 9,308 वोट रहा। कांग्रेस के अब्दुल मन्नान अंसारी 21.56% के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017: कांग्रेस की जीत

2017 में प्रदेश में भाजपा की लहर के बावजूद कांग्रेस के सोहिल अख्तर अंसारी यहां जीते। उन्हें 81,169 वोट (46.19%) मिले। भाजपा के रघुनंदन सिंह को 71,805 वोट (40.86%) मिले। अंतर 9,364 वोट रहा। बसपा के नसीम अहमद 8.01% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस तरह 2017 में कानपुर कैंट विधानसभा सीट उन गिनी-चुनी सीटों में रही, जहां कांग्रेस जीती। आयोग के रिकॉर्ड में उस चुनाव में कांग्रेस को कुल 7 सीटें मिली थीं।

2022: सपा की जीत

2022 में सपा के मोहम्मद हसन रूमी ने 94,729 वोट (49.99%) पाकर कानपुर कैंट विधानसभा सीट जीती। भाजपा के रघुनंदन सिंह भदौरिया को 74,742 वोट (39.44%) मिले। अंतर 19,987 वोट रहा। कांग्रेस के सोहिल अख्तर अंसारी का वोट गिरकर 7.01% रह गया। बसपा को 1.79% वोट मिले।

मतदाताओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2012 में यहां 2,97,863 और 2017 में 3,35,587 मतदाता थे। 2022 में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर 3,61,855 मतदाता थे और 52.37% मतदान हुआ। 2012 में मतदान 48.46% और 2017 में 52.58% था। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।

कानपुर कैंट विधानसभा सीट और 2027

पिछले तीन चुनावों में भाजपा यहां हर बार पहले या दूसरे स्थान पर रही। उसका वोट शेयर 29.48% से बढ़कर 39-41% के बीच पहुंचा है। दूसरी तरफ 2022 में विपक्ष का वोट सपा के पीछे एकजुट दिखा। 2027 में मुकाबला इसी पर टिकेगा कि यह एकजुटता बनी रहती है या नहीं।

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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सांख्यिकीय रिपोर्टें (1967 से 2022)।

स्रोत

  1. ECI: Uttar Pradesh General Legislative Election 2022 - Statistical Reports
  2. ECI: Statistical Reports, Uttar Pradesh Legislative Assembly (1967-2017)
  3. Wikimedia Commons: Kanpur Memorial Church

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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