मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया द्विवार्षिक विधान परिषद चुनावों में सत्ताधारी दल को मिले परिणामों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इन मुकाबलों को राजनीतिक ताकत की एक बड़ी परख के रूप में देखा जा रहा था, जिसके नतीजे आने के बाद विपक्षी खेमे में उत्साह नजर आ रहा है।
विभिन्न मीडिया स्रोतों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कुल ग्यारह सीटों पर हुए इस द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा को छह और समाजवादी पार्टी को पांच सीटों पर सफलता हासिल हुई है। वाराणसी क्षेत्र के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा है और स्नातक सीट पर भी उसकी स्थिति हार के कगार पर पहुंच चुकी है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की है जबकि इसी दल के दूसरे प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा बढ़त बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट के हवाले से यह भी सामने आया है कि लखनऊ की स्नातक सीट पर सत्ता दल द्वारा कुर्मी उम्मीदवार खड़े किए जाने के बावजूद उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा, जहां समाजवादी पार्टी की महिला कुर्मी प्रत्याशी ने बाजी मारी। वाराणसी और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आए इन परिणामों को लेकर विपक्षी दल के नेता ने इसे सत्ता पक्ष की दोहरी हार करार दिया है। विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक नफे नुकसान का आकलन
इन द्विवार्षिक विधान परिषद चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा की कार्यप्रणाली और उसकी नीतियों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डबल इंजन सरकार की दोहरी हार है। इन चुनावों के जरिए राज्य के राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही थी, जिस पर अब दोनों प्रमुख दलों की ओर से अपने अपने दावे किए जा रहे हैं।
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