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यूपी राजनीति

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में उच्चतम न्यायालय से याचिकाएं निस्तारित

राम मंदिर दान चोरी मामले से जुड़ी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने निपटाते हुए निचली अदालत को विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

राम मंदिर दान चोरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ग्राफिक: UP Election News

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अयोध्या स्थित राम मंदिर दान चोरी मामले में दायर की गई विभिन्न अर्जी पर उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए सुनवाई समाप्त कर दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस प्रकरण से संबंधित समस्त याचिकाओं को पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है। अदालत की ओर से इस संदर्भ में निचली अदालत को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई जारी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा इस विषय में अपनी विस्तृत जांच पूरी कर संबंधित न्यायालय के समक्ष आधिकारिक रूप से आरोपपत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। प्रदेश शासन की ओर से दाखिल इस दस्तावेज में प्रकरण से जुड़ी विभिन्न न्यायिक जानकारियों को शामिल किया गया है। इसके पश्चात ही देश की सर्वोच्च पीठ ने इस पूरे कानूनी विषय पर दायर याचिकाओं को आगे चलाने के बजाय बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।

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उच्चतम न्यायालय के नए आदेश के अनुसार, अब इस पूरे प्रकरण का संचालन निचली अदालत के माध्यम से विधि विधान के अनुरूप संपन्न कराया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थानीय स्तर की अदालत को पूरे मामले की सुनवाई जारी रखने की पूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस आदेश के माध्यम से न्यायपालिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों की समीक्षा अब निचले स्तर पर ही की जाएगी।

अदालती निर्देश और आगे की स्थिति

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निचली अदालत में मामले का न्यायिक परीक्षण यानी ट्रायल जारी रहने के दौरान मुख्य शिकायतकर्ता को भी विधिक सहायता देने का अवसर प्राप्त होगा। सुनवाई की पूरी अवधि में शिकायतकर्ता अपनी ओर से आवश्यक सहायता प्रदान करके न्यायालय के समक्ष सहयोग कर सकेंगे। इससे कानूनी जांच एवं साक्ष्यों की प्रस्तुति में शिकायतकर्ता पक्ष को अपनी बात रखने का सुदृढ़ आधार मिलेगा।

इस न्यायिक प्रकरण से संबंधित अन्य प्रशासनिक विवरणों और जांच से जुड़े कुछ विशिष्ट पहलुओं के संदर्भ में अभी विस्तृत जानकारी का इंतजार है। शासन स्तर पर दर्ज मामले की पूरी रिपोर्ट निचली अदालत के न्यायिक विचार के अधीन रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च अदालत द्वारा याचिकाओं के निस्तारण के बाद अब सभी की दृष्टि स्थानीय अदालत द्वारा ली जाने वाली आगामी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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स्रोत: आज तक; अमर उजाला

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