रामपुर विधानसभा सीट यूपी की उन सीटों में है, जिनकी पहचान एक नेता से जुड़ गई। सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान यहां से 1980 से 2022 के बीच 10 बार जीते। इस लेख के आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टों से हैं।
रामपुर विधानसभा सीट की पहचान
इस सीट का क्रमांक 37 है। 2002 और 2007 के आयोग के रिकॉर्ड में इसका क्रमांक 21 दर्ज है। 2022 में यहां 3,88,175 मतदाता थे और 56.61% मतदान हुआ। जिले में चमरौआ, बिलासपुर, स्वार और मिलक सीटें भी हैं।
आजम खान से पहले
1967 में स्वतंत्र पार्टी के ए. ए. खान जीते। 1969 में कांग्रेस के सैयद मुर्तजा अली खान को जीत मिली। 1974 और 1977 में कांग्रेस के मंजूर अली खान उर्फ शन्नू खान विधायक बने।
आजम खान की 10 जीत
आजम खान पहली बार 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) से जीते। 1985 में लोकदल और 1989 में जनता दल से उन्हें जीत मिली। 1991 में आयोग के रिकॉर्ड में उनकी पार्टी जनता पार्टी दर्ज है। 1993 से वह सपा के टिकट पर लड़े।
1996 में कांग्रेस के अफरोज अली खान ने यह सीट जीती। यह इस दौर में आजम खान की इकलौती हार थी। 2002 में वह फिर जीते। 2007 में उन्होंने अफरोज अली खान को 33,372 वोटों से हराया।
2012 और 2017
2012 में आजम खान को 95,772 वोट (55.31%) मिले। कांग्रेस के डॉ. तनवीर अहमद खान 63,269 वोट पीछे रहे। 2017 में रामपुर विधानसभा सीट पर भाजपा दूसरे स्थान पर आई। आजम खान ने भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को 46,842 वोटों से हराया।
मतदान
रामपुर विधानसभा सीट पर मतदान 2012 में 54.33% और 2017 में 56.32% रहा। 2022 में यह 56.61% था। यानी तीनों चुनावों में मतदान प्रदेश के औसत के आसपास या उससे कम रहा।
2022 और उसके बाद
2022 में आजम खान को 1,31,225 वोट (59.71%) मिले। भाजपा के आकाश सक्सेना को 76,084 वोट (34.62%) मिले। अंतर 55,141 वोट रहा। बसपा सिर्फ 2.25% पर सिमटी। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।
2017 में भाजपा ने यहां शिव बहादुर सक्सेना को उतारा था। उन्हें 55,258 वोट (25.84%) मिले और वे 46,842 वोट से हारे। 2022 में भाजपा के आकाश सक्सेना का वोट बढ़कर 76,084 हुआ। फिर भी आजम खान का अंतर बढ़कर 55,141 हो गया, जबकि बसपा का वोट 2.25% पर सिमट गया।
विश्लेषण: 2027 में रामपुर विधानसभा सीट
आम चुनावों में सपा का वोट शेयर यहां लगातार ऊंचा रहा। 2017 में 47.74% से यह 2022 में 59.71% पहुंचा। भाजपा का हिस्सा भी 25.84% से बढ़कर 34.62% हुआ। बसपा का वोट 2017 के 25.36% से घटकर 2022 में 2.25% रह गया। 2017 में बसपा के टिकट पर डॉ. तनवीर अहमद खान लड़े थे और भाजपा से सिर्फ 1,010 वोट पीछे तीसरे स्थान पर रहे।
2027 में भाजपा यहां अपनी बढ़ती हिस्सेदारी के दम पर दावेदारी करेगी। रामपुर विधानसभा सीट का नतीजा सपा के उम्मीदवार चयन पर भी काफी हद तक निर्भर करेगा।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सांख्यिकीय रिपोर्टें (1967 से 2022)।


