SIR के बीच Form-6 से हटा Annexure-D, जानें नए वोटर के लिए क्या बदला

मतदान केंद्र पर कतार में खड़ी महिला मतदाता
फाइल फोटो: मतदान केंद्र पर कतार में खड़ी महिला मतदाता। फोटो: Election Commission of India / Wikimedia Commons, GODL-India (क्रॉप/रीसाइज़ किया गया)

संक्षेप में

  • SIR Form 6 Update: एसआईआर पूरा कर चुके राज्यों में नए वोटर के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 के साथ Annexure-D की अनिवार्यता हटाई गई है। जहां एसआईआर जारी है, वहां अतिरिक्त घोषणा लागू रहेगी। जानें इस बदलाव का नए मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा।

SIR Form 6 Update: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के विवाद के बीच फॉर्म-6 को लेकर बड़ा अपडेट आया है। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म-6 के साथ जुड़ा Annexure-D हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि उन राज्यों में नया वोटर बनते समय पुरानी वोटर सूची और परिवार के पुराने दस्तावेज वाली अतिरिक्त घोषणा अब जरूरी नहीं रहेगी।

फॉर्म-6 वह फॉर्म है जिससे नया वोटर अपना नाम वोटर सूची में जुड़वाता है। एसआईआर वाले दौर में इसके साथ Annexure-D जोड़ा गया था। उसी में 2003 की सूची और दादा-दादी या माता-पिता के नाम की जानकारी मांगी जा रही थी। अब यह अतिरिक्त हिस्सा पूरे देश में नहीं चलेगा। सिर्फ उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रहेगा जहां एसआईआर अभी चल रहा है।

SIR Form 6 Update: क्या हटा और कहां हटा?

विषय स्थिति
फॉर्म-6 नया वोटर जोड़ने का कानूनी फॉर्म
Annexure-D एसआईआर के दौरान जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा
जहां एसआईआर पूरा Annexure-D हटा दिया गया
जहां एसआईआर चल रहा ECINET पर घोषणा अभी उपलब्ध
फैसला 26 सितंबर की आयोग बैठक के बाद

फॉर्म-6 आखिर होता क्या है?

फॉर्म-6 चुनाव आयोग की वेबसाइट और प्रक्रिया में नया वोटर बनने का मुख्य फॉर्म है। इसे भरने के बाद जांच होती है और नाम सूची में जुड़ता है। सामान्य समय में यही फॉर्म काफी था। एसआईआर शुरू होने के बाद कई राज्यों में इसके साथ Annexure-D अनिवार्य कर दिया गया।

Annexure-D में आवेदक से पुरानी वोटर सूची में अपना या परिवार के सदस्यों का नाम बताने को कहा गया। कई लोगों को 2003 की सूची खंगालनी पड़ी। दादा-दादी और माता-पिता के दस्तावेज ढूंढने पड़े। यही हिस्सा विवाद का केंद्र बना। आयोग का कहना था कि घुसपैठ रोकने और सूची सही रखने के लिए यह घोषणा जोड़ी गई।

SIR Form 6 Update: आयोग ने कहां-कहां घोषणा हटाई?

फैसला उन राज्यों के लिए है जहां एसआईआर पूरा हो चुका है। वहां ईसीआईनेट ऐप, पोर्टल और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से यह डिक्लेरेशन हटा दिया गया है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर अभी चल रहा है, वहां ईसीआईनेट पर यह घोषणा अभी भी दिखेगी।

आयोग का रुख है कि यह अतिरिक्त जानकारी सिर्फ एसआईआर प्रक्रिया के दौरान देनी थी। प्रक्रिया खत्म होने के बाद सामान्य नियम लागू होंगे। यानी अब एनरोलमेंट चाहने वाले आवेदक को रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत तय कानूनी फॉर्म-6 ही भरना होगा।

26 सितंबर की बैठक में क्या तय हुआ?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की टीम की 26 सितंबर को बैठक हुई। उसके बाद यह फैसला आया। आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 के साथ जुड़ा डिक्लेरेशन एसआईआर के लिए था। एसआईआर के अलावा बाकी समय में 1960 के नियमों वाला फॉर्म ही चलेगा।

इसी बैठक में आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों को तीनों आयुक्तों की सहमति वाला भी बताया था। विवाद तब बढ़ा जब खबर आई कि संधू और जोशी ने फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी। उसी असहमति की चर्चा के बाद गैर-एसआईआर राज्यों से अतिरिक्त घोषणा हटाना आयोग का व्यावहारिक कदम लगता है।

SIR Form 6 Update: बदलाव की वजह क्या बताई गई?

चुनाव आयोग के मुताबिक घुसपैठ रोकने और वोटर सूची दुरुस्त रखने के लिए एसआईआर में अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था। दो आयुक्तों की आपत्ति यह थी कि वोटर रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के तहत फॉर्म-6 में बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी हो सकती है। आयोग खुद ऑनलाइन पोर्टल पर इसे अनिवार्य नहीं कर सकता।

आयोग के अंदर मतभेद के बाद रास्ता यह निकाला गया कि अतिरिक्त घोषणा सिर्फ चल रहे एसआईआर वाले इलाकों तक सीमित रहे। बाकी जगह सामान्य फॉर्म-6 काफी है। नए वोटर के लिए राहत यह है कि जहां प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां पुरानी सूची और पारिवारिक लिंक की अतिरिक्त जानकारी नहीं देनी पड़ेगी।

वोटर पर क्या असर पड़ेगा?

जिन राज्यों में एसआईआर खत्म हो गया है, वहां नया नाम जुड़वाना पहले से सरल होना चाहिए। सिर्फ निर्धारित फॉर्म-6 और उसके साथ लगने वाले सामान्य दस्तावेज काफी होंगे। जहां एसआईआर चल रहा है, वहां पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। पहली बार वोट डालने वाले युवा और छूटे वोटर इसी फर्क को महसूस करेंगे।

विवाद खत्म हुआ हो, यह कहना जल्द है। विपक्ष एसआईआर और फॉर्म बदलाव को लेकर सवाल उठाता रहा है। आयोग अब कह रहा है कि अतिरिक्त घोषणा विशेष प्रक्रिया तक सीमित थी। कानूनी फॉर्म वापस मुख्य भूमिका में है। आवेदकों को अपने राज्य में एसआईआर पूरा हुआ या नहीं, यह जरूर देख लेना चाहिए। उसी से तय होगा कि Annexure-D भरना है या नहीं।

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फीचर्ड फोटो (फाइल): The voters standing in a queue for casting their votes at a polling booth, at Beemapally Govt.U.P. School, in Trivandrum, during General Elections-2009 on April 16, 2009.jpg, Election Commission of India, Wikimedia Commons, GODL-India लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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