मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश समेत कुल पांच राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण के पश्चात मतदाताओं की कुल संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अगले वर्ष जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद कुल दो करोड़ انसठ लाख से अधिक मतदाता कम हुए हैं। अकेले उत्तर प्रदेश राज्य के आंकड़ों पर गौर करें तो वहां दो करोड़ चार लाख मतदाताओं की कमी आई है।
उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक जिन राज्यों में यह प्रक्रिया संपन्न हुई है उनमें उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इन सभी पांच चुनावी राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में अगले साल ही नए विधायकों के चुनाव के लिए मतदान होना है।
विस्तृत जानकारी का इंतजार है कि किन कारणों और किस प्रक्रिया के तहत इतनी बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या घटना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रशासनिक अमला पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है और इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।
चुनावी तैयारियों की समीक्षा और अधिकारियों का दौरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आगामी चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने के लिए संबंधित अधिकारी लगातार इन राज्यों का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान उच्च स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं जिनमें प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चुनावी तैयारियों का पूरा ब्योरा लिया जा रहा है।
इन बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की स्थिति और अद्यतन मतदाता सूचियों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है ताकि आगामी चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जा सके। चूंकि इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची के आंकड़ों में भारी फेरबदल हुआ है, इसलिए राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक कदमों पर भी सबकी निगाहें बनी हुई हैं।
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स्रोत: आज तक
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