मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद पांच राज्यों में कुल दो करोड़ उन्नतीस लाख मतदाता कम हो गए हैं। इस सूची में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है जहां सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की तरफ से इन सभी संबंधित राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।
विभिन्न मीडिया माध्यमों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन पांच क्षेत्रों में यह बदलाव देखा गया है उनमें उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इन सभी जगहों पर सूची अद्यतन करने का कार्य पूरा किया गया है जिसके बाद कुल आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर ही दो करोड़ चार लाख मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। कुल राष्ट्रीय स्तर पर आई इस बड़ी कमी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी राज्य से जुड़ा हुआ है जिससे चुनावी समीकरणों पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
आवेदन खारिज होने के कारण
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फॉर्म छह के कई आवेदन अस्वीकार किए जाने का मामला भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से लगभग सैंतीस प्रतिशत आवेदन इसलिए रद्द किए गए क्योंकि उनके साथ आवश्यक घोषणा पत्र संलग्न नहीं किया गया था। चुनावी अधिकारियों ने इन मामलों के संबंध में प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।
फिलहाल चुनाव आयोग द्वारा इन पांचों राज्यों में आगामी विधायी चुनावों के आयोजन के लिए आवश्यक प्रबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मतदाता सूची के इस बड़े फेरबदल के बाद आगे की प्रशासनिक गतिविधियों और विस्तृत आंकड़ों के संबंध में आधिकारिक सूचना का इंतजार किया जा रहा है। विस्तार से पढ़ें: Democratic Bharat Live
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