उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगने जा रहा है। सपा के तीन बागी विधायक 14 अक्टूबर को भाजपा में शामिल होंगे। इनमें गौरीगंज के राकेश प्रताप सिंह, गोसाईगंज के अभय सिंह और कालपी के विनोद चतुर्वेदी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम अमेठी के गौरीगंज में होगा।
गौरीगंज में होगा बागी विधायकों का जॉइनिंग कार्यक्रम
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों विधायक एक बड़े कार्यक्रम में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता लेंगे। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मौजूद रहेंगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और कई मंत्री भी शामिल होंगे।
बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह ने खुद एक्स पर इसकी जानकारी दी है। एबीपी न्यूज के मुताबिक, उन्होंने लिखा कि वह 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से सदस्यता ग्रहण करेंगे। यह कार्यक्रम गौरीगंज स्थित उनके निजी आवास ‘मंगलम’ के प्रांगण में होगा। उन्होंने समर्थकों से उस दिन कोई और कार्यक्रम न रखने की अपील भी की।
दैनिक भास्कर से बातचीत में राकेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो राम और राष्ट्र का नहीं, उसके साथ नहीं चल सकते।
राज्यसभा चुनाव की क्रॉस वोटिंग से शुरू हुई दूरी
ये तीनों बागी विधायक फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में चर्चा में आए थे। तब सपा के सात विधायकों ने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, इसी क्रॉस वोटिंग से भाजपा के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ जीते थे।
इसके बाद सपा ने जून 2025 में तीन बागी विधायकों को पार्टी से निकाल दिया। इनमें अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार के मनोज कुमार पांडेय थे। बाद में विधानसभा ने तीनों को असंबद्ध सदस्य घोषित कर दिया। हालांकि, उस समय कालपी के विनोद चतुर्वेदी समेत चार विधायकों पर कार्रवाई नहीं हुई थी। सपा ने इसके पीछे उनके ‘अच्छे आचरण’ का हवाला दिया था।
वहीं, इस महीने 5 अक्टूबर को तीनों बागी विधायकों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया था। लेकिन तभी से इनके भाजपा में जाने की चर्चा तेज हो गई थी।
तीनों बागी विधायक कितने मजबूत?
इन तीनों बागी विधायकों की अपने इलाके में अच्छी पकड़ मानी जाती है। 2022 के नतीजे इसकी गवाही देते हैं।
राकेश प्रताप सिंह: गौरीगंज से लगातार तीसरी बार
राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से लगातार तीन बार विधायक बने हैं। 2022 में उन्हें 79,040 वोट मिले थे। भाजपा के चंद्र प्रकाश मिश्रा को 72,077 वोट मिले। इस तरह उन्होंने 6,963 वोटों से जीत हासिल की थी।
विनोद चतुर्वेदी: कालपी में करीबी जीत
विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी सीट से लगातार दो बार के विधायक हैं। 2022 में उन्हें 69,782 वोट मिले थे। निषाद पार्टी के छोटे सिंह को 66,966 वोट मिले। उस चुनाव में निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी थी। जीत का अंतर सिर्फ 2,816 वोट रहा।
अभय सिंह: गोसाईगंज में खब्बू तिवारी परिवार से मुकाबला
अयोध्या की गोसाईगंज सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनी थी। पिछले तीन चुनावों में यहां मुकाबला अभय सिंह और इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी के परिवार के बीच रहा है। 2022 में अभय सिंह को 1,05,863 वोट मिले। भाजपा की आरती तिवारी को 92,784 वोट मिले थे। इस तरह अभय सिंह 13,079 वोटों से जीते थे।
अखिलेश के लिए क्या हैं मायने?
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव प्रक्रिया चल रही है। एबीपी न्यूज के अनुसार, अखिलेश यादव ने हाल में पार्टी से दूर हुए साथियों से लौटने की अपील की थी। लेकिन बागी विधायकों ने उल्टा भाजपा का रास्ता चुना। दूसरी ओर, न्यूज18 के मुताबिक, दो निर्दलीयों के पर्चे खारिज हो चुके हैं। इसलिए इस बार मतदान की नौबत न आने की संभावना है।
इसके अलावा, भाजपा की सहयोगी सुभासपा के प्रमुख और मंत्री ओपी राजभर भी अखिलेश पर हमलावर हैं। इंडिया टीवी के मुताबिक, उन्होंने अखिलेश के 403 सीटों वाले दावे पर तंज कसा था। राजभर ने कहा था, “मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स!”
फिलहाल सपा की ओर से इस जॉइनिंग पर कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए सबकी नजर 14 अक्टूबर के कार्यक्रम पर है। गौरीगंज, कालपी और गोसाईगंज में इसका असर 2027 के चुनाव में दिख सकता है। 2022 के नतीजों और जीत के अंतर का विश्लेषण ADR की रिपोर्ट में देखा जा सकता है।
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