UP Election 2027: ओवैसी का विपक्ष को ऑफर, बोले- अकेले कोई भाजपा नहीं हरा सकता, साथ आओ

UP Election 2027
UP Election 2027

संक्षेप में

  • ओवैसी ने UP Election 2027 के लिए समान विचारधारा वाले दलों को बातचीत का न्योता दिया।
  • उनका कहना है कि कोई विपक्षी दल अकेले भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक सकता।
  • बिहार में छह सीटों पर गठबंधन प्रस्ताव स्वीकार नहीं होने का दावा किया।
  • सपा की पूर्व सरकार और भाजपा सरकार, दोनों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
  • यह गठबंधन का प्रस्ताव है; इसे गठबंधन की घोषणा न बताएं।

UP Election 2027: आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी दलों को गठबंधन का न्योता दिया है। उनका साफ कहना है कि कोई भी दल अकेले भाजपा को नहीं रोक सकता। अगर मकसद भाजपा की हैट्रिक रोकना है तो एआईएमआईएम साथ काम करने को तैयार है।

ओवैसी ने एएनआई से बात करते हुए समान विचारधारा वाले दलों से एकजुट होने को कहा। उन्होंने बिहार वाला अनुभव भी याद दिलाया जहां सीटें नहीं मिलीं। साथ ही समाजवादी पार्टी की पुरानी सरकार और योगी सरकार दोनों पर आलोचना की। राम मंदिर कथित गबन मामले की एसआईटी रिपोर्ट और कानून-व्यवस्था को चुनाव का मुद्दा बताया।

विषय ओवैसी का रुख
ऑफर भाजपा रोकने के लिए विपक्ष से बातचीत
शर्त अकेले लड़कर भाजपा नहीं रुकेगी
बिहार अनुभव आरजेडी-कांग्रेस से 6 सीटें मांगी, सहमति नहीं बनी
यूपी संगठन जमीनी नेतृत्व मजबूत होने का दावा
चुनावी मुद्दे कानून-व्यवस्था, बिजली, भूमि, अधूरे वादे

ओवैसी ने विपक्ष को क्या ऑफर दिया?

ओवैसी ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार नहीं बनने देना चाहते। जो दल भाजपा को सत्ता में नहीं देखना चाहता, वह उनसे बात कर सकता है। भाजपा को रोकने के लिए एआईएमआईएम साथ खड़ी होने को तैयार है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि अकेले कोई भाजपा को नहीं रोक सकता।

यह बयान यूपी में विपक्षी एकता की बहस को फिर खोलता है। सपा सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। कांग्रेस और बसपा भी मैदान में हैं। एआईएमआईएम मुस्लिम वोटरों वाले इलाकों में अपने उम्मीदवार उतारती रही है। ओवैसी का ऑफर साफ है। सीटें और तालमेल की बात हो सकती है, बशर्ते लक्ष्य भाजपा रोकना हो। सपा अब तक एआईएमआईएम से दूरी बनाए रखने वाली लाइन पर रही है। इसलिए यह न्योता कितना आगे बढ़ेगा, यह सपा और कांग्रेस के जवाब पर निर्भर है।

UP Election 2027: बिहार वाली नाराजगी क्यों दोहराई गई?

ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई और अन्य कम्युनिस्ट दलों को पत्र लिखा था। मांग सिर्फ छह सीटों की थी। वे सहमत नहीं हुए। इसके बाद भी एआईएमआईएम अपना काम जारी रखेगी। बात हो या न हो, संगठन चलता रहेगा।

यूपी के संदर्भ में यह संकेत है कि सीट बंटवारे पर लचीलापन हो सकता है, लेकिन अनदेखा किए जाने का गुस्सा भी बाकी है। उन्होंने कहा कि यूपी में संगठन मजबूत हुआ है और नेतृत्व जमीन से उभरा है। अगर भाजपा रोकनी है तो आकर बात करें। संदेश दोहरा है। सहयोग की तैयारी है, दबाव बनाने की भाषा भी है। छह सीटों वाला बिहार सूत्र यूपी में कितनी सीटों की मांग बनेगा, यह अभी खुला है।

UP Election 2027: सपा और भाजपा दोनों पर क्या निशाना था?

ओवैसी ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सपा के राज में एक तरह की गुंडागर्दी होती थी। अब भाजपा सरकार में दूसरी तरह की गुंडागर्दी हो रही है। यानी वे खुद को दोनों से अलग रखना चाहते हैं। गठबंधन का ऑफर देते हुए भी सपा को साफ नहीं जाने दिया।

यह रणनीति एआईएमआईएम की पुरानी लाइन से मिलती है। मुस्लिम वोटरों से कहना कि सपा सिर्फ यादव पार्टी रह गई और भाजपा से सुरक्षा नहीं मिल रही। कानपुर जैसी सभाओं में ओवैसी पहले भी सपा के एमवाई समीकरण पर सवाल उठा चुके हैं। यूपी में अगर गठबंधन नहीं बना तो यही आलोचना चुनाव प्रचार का हिस्सा बनेगी। अगर बात आगे बढ़ी तो तेवर नरम हो सकते हैं। फिलहाल दोनों संभावनाएं खुली हैं।

चुनाव में कौन से मुद्दे उठाएंगे?

ओवैसी ने राम मंदिर से जुड़े कथित गबन मामले की एसआईटी रिपोर्ट का सवाल उठाया। रिपोर्ट जनता के सामने क्यों नहीं है। आरोपियों को जमानत कैसे मिल रही है। इसे वे चुनावी मुद्दा बनाने की बात कर रहे हैं। इसके अलावा भाजपा सरकार के अधूरे वादे, शासन, कानून-व्यवस्था, बिजली और भूमि विवाद को भी बड़े मुद्दे बताया।

उन्होंने चेतावनी दी कि 2027 के चुनाव को 2014, 2017, 2019 या 2022 की नजर से मत देखो। मुकाबला अलग होगा। चुनौतियां नई होंगी। यह वाक्य विपक्ष को पुराने समीकरणों पर आराम न करने का इशारा भी है। यूपी में कानून-व्यवस्था और स्थानीय विवाद हमेशा चुनावी चर्चा में रहते हैं। ओवैसी इन्हीं मुद्दों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं।

UP Election 2027: क्या विपक्ष ओवैसी के साथ आएगा?

यूपी में सरकार के लिए 202 सीटें चाहिए। भाजपा दो बार जीत चुकी है। विपक्ष बंटा रहा तो ओवैसी का तर्क मजबूत लगता है। व्यावहारिक राजनीति अलग है। सपा मुस्लिम वोटरों को अपना पारंपरिक आधार मानती है। एआईएमआईएम के साथ गठबंधन उसी आधार में सेंध का खतरा भी पैदा कर सकता है। कांग्रेस की स्थिति कमजोर है। बसपा अपना खेल अलग खेल रही है।

इसलिए ऑफर आया है, स्वीकार होना अभी दूर है। ओवैसी कह रहे हैं कि दरवाजा खुला है। अकेले भाजपा नहीं रुकेगी। बिहार में छह सीटें भी नहीं मिलीं। यूपी में बात करो। सपा सरकार और भाजपा सरकार दोनों पर सवाल हैं। मुद्दे कानून-व्यवस्था से एसआईटी रिपोर्ट तक हैं। विपक्षी दल जवाब देंगे या चुप रहकर अपने हिसाब से चुनाव लड़ेंगे, यही अगला पड़ाव होगा। फिलहाल ओवैसी ने गेंद विपक्ष के पाले में फेंक दी है।

Read More Here

टैग: , , , , , , ,

Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

इनकी सभी खबरें →
इस खबर में गलती दिखी? हमें बताएं
हम हर सूचना की जाँच करते हैं। Corrections Policy