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चुनाव

TMC Symbol Dispute: TMC नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा- कब तक होगा निपटारा?

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की इमारत का सामने का दृश्य
फाइल फोटो: नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की इमारत का सामने का दृश्य। फोटो: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप/रीसाइज़ किया गया)

TMC Symbol Dispute: ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने चुनाव आयोग से सीधा सवाल किया कि दोनों पक्षों के हित देखते हुए याचिका का निपटारा कितने समय में होगा। आयोग के वकील को निर्देश लेकर जवाब देने को कहा गया। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े बंटवारे से जुड़ा है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी को 15 साल बाद सत्ता छोड़नी पड़ी। इसके बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई। नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव नजदीक हैं। इसलिए नाम और चिह्न का विवाद और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

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विषय स्थिति
मामला TMC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करना
अदालत का सवाल EC कब तक निपटारा करेगा
अगली सुनवाई सोमवार
ममता गुट ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी
बागी गुट डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, चिह्न लिफाफा
उपचुनाव नंदीग्राम और रेजीनगर, मतदान 6 अक्टूबर

TMC Symbol Dispute: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की समय-सीमा पर ध्यान दिया। अदालत का जोर इस बात पर था कि दोनों गुटों के अधिकार बचे रहें। नाम और चुनाव चिह्न किसी पार्टी की पहचान होते हैं। इन्हें फ्रीज रखने या बांटने का फैसला उपचुनाव से पहले साफ होना चाहिए।

अदालत ने आयोग के वकील से कहा कि आयोग से निर्देश लें और बताएं कि याचिका कितने समय में निपटेगी। फिलहाल अंतिम आदेश नहीं आया। सोमवार की सुनवाई में आयोग का रुख और साफ हो सकता है। यह मामला सिर्फ कागजी नहीं है। इससे उपचुनाव का मैदान सीधे प्रभावित होगा।

TMC Symbol Dispute: TMC में बगावत कैसे शुरू हुई?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद सत्ता गई। 15 साल बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से बाहर हुईं। इसके बाद पार्टी के अंदर दरार चौड़ी हो गई। 80 में से 58 विधायकों ने बगावत कर दी। इस गुट की अगुवाई संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों पहले पार्टी से निकाले जा चुके थे।

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बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता घोषित किया। स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दे दी। विधायकों के बाद कई सांसद भी पार्टी से अलग हो गए। एक पार्टी दो खेमों में बंट गई। एक तरफ ममता बनर्जी हैं। दूसरी तरफ बागी विधायक और सांसद हैं। नाम और चुनाव चिह्न इसी बंटवारे का केंद्र बन गए।

TMC Symbol Dispute: दोनों गुटों को कौन सा नाम और चिह्न मिला?

उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग पहचान दी। ममता बनर्जी वाले गुट को नाम मिला ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस। चुनाव चिह्न मिला फुटबॉल खिलाड़ी। ऋतब्रत बनर्जी वाले गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम दिया गया। उनका चिह्न लिफाफा है।

पुराना तृणमूल कांग्रेस वाला नाम और मूल चिह्न फ्रीज होने के कारण यह व्यवस्था की गई। दोनों गुट अब अपने नए नाम और चिह्न से चुनाव लड़ सकते हैं। विवाद इसलिए है कि मूल नाम और चिह्न पर दावा दोनों तरफ से है। आयोग के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट अब यही देख रहा है कि अंतिम फैसला कब तक आएगा।

नंदीग्राम में ममता ने कांग्रेस को समर्थन क्यों दिया?

नया नाम और चिह्न मिलने के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में अलग रणनीति अपनाई। उनके खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता ने ऐलान किया कि उनका गुट नंदीग्राम से नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया जाएगा।

संचिता प्रधान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद नाम वापस लिया। यह कदम स्थानीय समीकरण से जुड़ा माना जा रहा है। नंदीग्राम पहले भी चर्चा में रहा है। यहां ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ चुकी हैं। अब उनके गुट का कांग्रेस को समर्थन बंगाल की नई राजनीति का संकेत है। सत्ता में शुभेंदु अधिकारी हैं। विपक्ष बिखरा हुआ है। ऐसे में गठजोड़ और समर्थन के फैसले तेजी से बदल रहे हैं।

TMC Symbol Dispute: रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव कब होंगे?

चुनाव आयोग दोनों सीटों पर उपचुनाव की तारीखें घोषित कर चुका है। नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होगा। 9 अक्टूबर को मतगणना और नतीजे आएंगे। नामांकन 16 सितंबर तक दाखिल हो सकते थे। 17 सितंबर को जांच हुई। 19 सितंबर तक उम्मीदवारी वापस ली जा सकती थी।

इसी समयसीमा के चलते नाम और चिह्न का विवाद अदालत तक पहुंचा। उपचुनाव करीब हैं। अगर मूल नाम और चिह्न को लेकर अनिश्चितता रही तो मतदाताओं में भ्रम बढ़ सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से निपटारे की समय-सीमा मांगी है। सोमवार की सुनवाई इसी दिशा में अगला कदम होगी।

कुल मिलाकर तृणमूल कांग्रेस का विभाजन अब कानूनी लड़ाई बन चुका है। ममता गुट फुटबॉल खिलाड़ी चिह्न के साथ मैदान में है। बागी गुट लिफाफे के साथ है। नंदीग्राम में ममता कांग्रेस के साथ खड़ी हैं। रेजीनगर पर भी नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के अगले कदम तय करेंगे कि पुराना नाम और चिह्न किसे मिलता है या दोनों गुट नए प्रतीकों से ही चुनाव लड़ते हैं। बंगाल की राजनीति फिलहाल इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द घूम रही है।

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फीचर्ड फोटो (फाइल): Supreme Court of India front view 06.jpg, Pinakpani, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।

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