यूपी में आरक्षित सीटें हर विधानसभा चुनाव में सत्ता का गणित तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। 403 सीटों वाली विधानसभा में 84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। पिछले तीन चुनावों में इन सीटों पर सबसे ज्यादा जीत उसी दल को मिली, जिसने सरकार बनाई।
संविधान में क्या प्रावधान है
संविधान का अनुच्छेद 332 राज्यों की विधानसभाओं में SC और ST के लिए सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। सीटों की संख्या आबादी के अनुपात से तय होती है। अनुच्छेद 334 इस आरक्षण की समय-सीमा तय करता है। पूरा पाठ विधि मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
आरक्षित सीट पर सिर्फ उसी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है। लेकिन वोट उस क्षेत्र के सभी मतदाता डालते हैं। SC और ST उम्मीदवारों के लिए जमानत राशि भी आधी, यानी 5,000 रुपये होती है।
यूपी में आरक्षित सीटें कितनी हैं
यूपी में आरक्षित सीटें विधानसभा की कुल सीटों का करीब 21% हैं। चुनाव आयोग की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, 317 सीटें सामान्य, 84 SC और 2 ST थीं। 2017 में भी यही संख्या थी। 2012 में 85 सीटें SC के लिए आरक्षित थीं और कोई ST सीट नहीं थी।
2017 के चुनाव से सोनभद्र जिले की ओबरा और दुद्धी सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। 2012 में दुद्धी SC सीट थी, जबकि ओबरा सामान्य सीट थी। SC सीटें प्रदेश के लगभग हर हिस्से में फैली हैं, जैसे सहारनपुर की रामपुर मनिहारन, आगरा कैंट, हाथरस और मेरठ की हस्तिनापुर।

किस दल ने कितनी SC सीटें जीतीं
ये आंकड़े चुनाव आयोग की विजेता सूचियों के आधार पर हमारी गणना हैं।
2012
85 SC सीटों में सपा ने 58 और बसपा ने 15 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 4, रालोद और भाजपा को 3-3 और निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं। उस साल सपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
2017
84 SC सीटों में भाजपा ने 69 सीटें जीतीं। सपा को 7, सुभासपा को 3, बसपा और अपना दल (एस) को 2-2 और एक निर्दलीय को जीत मिली। ओबरा भाजपा और दुद्धी अपना दल (एस) के खाते में गई।
2022
84 SC सीटों में भाजपा 58 पर जीती और अपना दल (एस) को 5 सीटें मिलीं। सपा ने 16, सुभासपा ने 3 और रालोद व जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) ने 1-1 सीट जीती। बसपा और कांग्रेस को एक भी SC सीट नहीं मिली। दोनों ST सीटें भाजपा ने जीतीं।
विश्लेषण: 2027 में यूपी में आरक्षित सीटें
आंकड़े बताते हैं कि यूपी में आरक्षित सीटें किसी एक दल से बंधी नहीं रहीं। 2012 में यहां सपा आगे थी और 2017 में भाजपा ने बड़ी बढ़त ली। 2022 में भी भाजपा आगे रही, लेकिन सपा की SC सीटें 7 से बढ़कर 16 हो गईं।
बसपा के लिए यह गिरावट खास है, क्योंकि उसकी राजनीति का बड़ा आधार दलित मतदाता रहे हैं। 2027 में यूपी में आरक्षित सीटें फिर बड़ा मुद्दा रहेंगी। बसपा की नई रणनीति पर हमारी रिपोर्ट आकाश आनंद की बसपा में वापसी पढ़ें। मतदाता बनने की प्रक्रिया पर फॉर्म-6 में हुए बदलाव की रिपोर्ट भी देखें।


