यूपी विधानसभा चुनाव देश का सबसे बड़ा राज्य स्तरीय चुनाव माना जाता है। 2022 में राज्य में 15 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत मतदाता थे। यह चुनाव कैसे होता है, कौन लड़ सकता है और सरकार कैसे बनती है, इसे यहां आसान भाषा में समझिए।
403 सीटें और 202 का बहुमत
उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सीटें हैं। हर सीट से एक विधायक चुना जाता है। सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को कम से कम 202 सीटें चाहिए।
मौजूदा सीटों की सीमाएं 2008 के परिसीमन से तय हैं। 403 में से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। सोनभद्र की ओबरा और दुद्धी सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। बाकी 317 सीटें सामान्य हैं, जहां कोई भी योग्य उम्मीदवार लड़ सकता है।
विधानसभा का कार्यकाल पहली बैठक से पांच साल का होता है। 2022 में चुनी गई 18वीं विधानसभा का कार्यकाल 2027 में पूरा होगा।
चुनाव कौन कराता है
यूपी विधानसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है। राज्य में यह काम मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के दफ्तर के जरिए होता है। जिले में जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं। हर सीट के लिए एक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त होता है।
18 साल या उससे ज्यादा उम्र का हर भारतीय नागरिक वोट दे सकता है, बशर्ते उसका नाम मतदाता सूची में हो। नाम जुड़वाने के नियमों पर हमारी रिपोर्ट Form-6 में हुए बदलाव पढ़ें।
घोषणा से मतगणना तक: चुनाव के चरण
चुनाव आयोग कार्यक्रम घोषित करता है और उसी समय से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इसके बाद हर चरण के लिए अधिसूचना जारी होती है। फिर नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की तारीखें आती हैं।
2022 का उदाहरण देखें। पहले चरण की अधिसूचना 14 जनवरी को जारी हुई। नामांकन की आखिरी तारीख 21 जनवरी, जांच 24 जनवरी और नाम वापसी 27 जनवरी थी। मतदान 10 फरवरी को हुआ। सातों चरणों की गिनती 10 मार्च को एक साथ हुई।
मतदान EVM से होता है और साथ में VVPAT मशीन लगी होती है। मतदाता चाहे तो ‘नोटा’ यानी ‘इनमें से कोई नहीं’ का बटन दबा सकता है।
उम्मीदवार के लिए नियम
यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल है। उम्मीदवार को 10,000 रुपये जमानत राशि जमा करनी होती है। अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के लिए यह 5,000 रुपये है।
अगर उम्मीदवार को कुल वैध वोटों का छठा हिस्सा भी नहीं मिलता, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। 2022 से बड़े राज्यों में विधानसभा उम्मीदवार की खर्च सीमा 40 लाख रुपये है। उम्मीदवार को नामांकन के साथ संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों का हलफनामा देना होता है।
नतीजे के बाद सरकार कैसे बनती है
यूपी विधानसभा चुनाव में हर सीट पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है। इसके लिए 50% वोट जरूरी नहीं हैं। नतीजों के बाद राज्यपाल बहुमत वाले दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने का न्योता देते हैं।
संविधान के मुताबिक मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से ज्यादा नहीं हो सकती। यूपी में यह सीमा 60 मंत्रियों की है। यही विधायक विधान परिषद और राज्यसभा के चुनाव में भी वोट डालते हैं। हाल का उदाहरण यूपी राज्यसभा चुनाव की रिपोर्ट में देखें।
विश्लेषण: यूपी विधानसभा चुनाव में छोटे अंतर क्यों अहम हैं
सबसे ज्यादा वोट वाली व्यवस्था में कुछ सौ वोट भी नतीजा बदल देते हैं। 2022 में कई सीटें 300 से कम वोटों से तय हुईं। इसलिए यूपी विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची, मतदान प्रतिशत और बूथ स्तर का प्रबंधन सभी दलों के लिए अहम रहते हैं।


