मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास पर शनिवार इकतीस अक्टूबर को एक विशेष मॉक संसद का आयोजन किया गया। इस बैठक के दौरान विपक्षी इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेता शामिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की पुरजोर मांग उठाई गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस राजनीतिक कार्यक्रम में देश के नागरिकों के मतदान के अधिकार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं का ऐसा मानना था कि मौजूदा समय में आम जनता के वोट देने का मौलिक अधिकार भारी खतरे के दौर से गुजर रहा है। इस पूरी चर्चा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए।
कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता ने इस विशेष अवसर पर निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ कुल छह प्रमुख आरोप जनता के सामने रखे। उन्होंने एसआईआर को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रद्द करने की पुरजोर मांग भी दोहराई। इस जनमहाभियोग कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा करना था।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव संचालन से जुड़ी संस्थाओं के काम करने के तरीके में पारदर्शिता की भारी कमी देखी जा रही है। बैठक में शामिल नेताओं ने मिलकर यह राय बनाई कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है। इस मामले में विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार किया जा रहा है।
मॉक संसद का आयोजन
विपक्षी दलों के इस अनूठे मंच पर देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर लंबी और विस्तृत चर्चा की गई। गठबंधन के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखना बहुत जरूरी है। इस पूरी कवायद के माध्यम से सरकार और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रमुख नेताओं ने मिलकर आगे की रणनीति पर भी विचार विमर्श किया। हालांकि इस मोर्चे पर सत्ता पक्ष की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है।
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स्रोत: इंडिया टीवी; प्रभात खबर
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