बसपा का इतिहास: कांशीराम की स्थापना से 2007 के बहुमत और 2022 की एक सीट तक

Prime Minister's Office, भारत सरकार / Wikimedia Commons, लाइसेंस: GODL-India

जुलाई 2007 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करतीं उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती
Prime Minister's Office, भारत सरकार / Wikimedia Commons, लाइसेंस: GODL-India

संक्षेप में

  • बसपा की स्थापना 14 अप्रैल 1984 को कांशीराम ने की; 2001 में उन्होंने मायावती को उत्तराधिकारी घोषित किया।
  • मायावती 1995, 1997, 2002 और 2007 में मुख्यमंत्री बनीं; 2007-12 की सरकार ने पूरे पांच साल पूरे किए।
  • यूपी विधानसभा में बसपा 2007 में 206 सीटों के शिखर पर पहुंची और 2022 में 1 सीट पर आ गई।
  • लोकसभा चुनाव में यूपी में बसपा को 9.39% वोट मिले, पर कोई सीट नहीं मिली।

बसपा का इतिहास उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े बदलावों में से एक की कहानी है। बहुजन समाज पार्टी ने दलित राजनीति को सत्ता तक पहुंचाया। पार्टी ने चार बार मुख्यमंत्री दिया और 2007 में अपने दम पर बहुमत हासिल किया। फिर अगले 15 साल में वह विधानसभा में एक सीट पर आ गई।

कांशीराम और बसपा की स्थापना

कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को बसपा की स्थापना की। यह दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का है। इससे पहले वे दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (DS-4) के जरिए काम कर रहे थे।

पार्टी का लक्ष्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों को एक राजनीतिक ताकत बनाना था। इन्हें मिलाकर ‘बहुजन’ कहा गया। पार्टी का चुनाव चिह्न हाथी है। 2001 में कांशीराम ने मायावती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।

गठबंधन की सरकारें: 1993 से 2003

बसपा का इतिहास बताता है कि 1989 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 13 सीटें जीतीं। 1993 में सपा के साथ गठबंधन में उसे 67 सीटें मिलीं और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। 2 जून 1995 को बसपा ने समर्थन वापस ले लिया।

इसके बाद मायावती 3 जून 1995 को भाजपा के समर्थन से पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। वे 1997 और 2002 में भी गठबंधन सरकार की मुखिया रहीं। ये तीनों सरकारें कुछ महीनों से लेकर करीब सवा साल तक चलीं।

2007: बसपा का इतिहास बदलने वाला चुनाव

2007 का विधानसभा चुनाव बसपा के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ रहा। पार्टी ने 403 में से 206 सीटें जीतीं और उसे 30.43% वोट मिले। 1991 के बाद पहली बार किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला था।

इस जीत में दलित वोटों के साथ सवर्ण और दूसरे वर्गों का समर्थन भी अहम माना गया। मायावती 13 मई 2007 को चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं। उनकी सरकार यूपी की पहली सरकार बनी जिसने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

अगस्त 2012 में संसद भवन में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतपेटी में वोट डालतीं मायावती
अगस्त 2012 में संसद भवन में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डालतीं मायावती। फोटो: Ministry of Parliamentary Affairs, भारत सरकार / Wikimedia Commons (GODL-India)

गिरावट का दौर: 2012 से 2024

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बसपा की सीटें 2012 में 80 और 2017 में 19 रह गईं। 2022 में पार्टी ने सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा। उसे सिर्फ 1 सीट और 12.88% वोट मिले। विस्तृत आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 की रिपोर्ट में हैं।

लोकसभा में भी बसपा का इतिहास इसी तरह के उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2009 में बसपा ने यूपी से 20 सीटें जीती थीं। 2014 में पार्टी खाता नहीं खोल पाई। 2019 में सपा और रालोद के साथ गठबंधन में उसे 10 सीटें मिलीं।

2024 में बसपा अकेले लड़ी और यूपी में कोई सीट नहीं जीत सकी। चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में उसका वोट 9.39% रहा।

उत्तराधिकार और संगठन

दिसंबर 2023 में मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित किया था। मई 2024 में उनसे यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई। पार्टी में उनकी वापसी पर हमारी रिपोर्ट आकाश आनंद की बसपा में वापसी पढ़ें।

विश्लेषण: बसपा का इतिहास 2027 के लिए क्या कहता है

बसपा का इतिहास दिखाता है कि पार्टी ने सबसे बड़ी जीत तब पाई जब उसका सामाजिक आधार दलित वोटों से आगे बढ़ा। 2022 में 12.88% वोट मिलने के बावजूद सीटें नहीं आईं। 2027 में पार्टी के लिए वोट को सीटों में बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी। संगठन में हाल के बदलावों पर मायावती का नया संगठनात्मक ढांचा देखें।

स्रोत

  1. ECI: Uttar Pradesh General Legislative Election 2022 - Statistical Reports
  2. ECI: General Election to Lok Sabha 2024 - Statistical Reports
  3. Wikipedia: Bahujan Samaj Party
  4. Wikipedia: 2024 Indian general election in Uttar Pradesh
  5. Wikimedia Commons: Mayawati calling on PM Manmohan Singh, July 20, 2007
  6. Wikimedia Commons: Mayawati casting vote in Vice Presidential election, August 7, 2012

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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