बसपा का इतिहास उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े बदलावों में से एक की कहानी है। बहुजन समाज पार्टी ने दलित राजनीति को सत्ता तक पहुंचाया। पार्टी ने चार बार मुख्यमंत्री दिया और 2007 में अपने दम पर बहुमत हासिल किया। फिर अगले 15 साल में वह विधानसभा में एक सीट पर आ गई।
कांशीराम और बसपा की स्थापना
कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को बसपा की स्थापना की। यह दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का है। इससे पहले वे दलित शोषित समाज संघर्ष समिति (DS-4) के जरिए काम कर रहे थे।
पार्टी का लक्ष्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों को एक राजनीतिक ताकत बनाना था। इन्हें मिलाकर ‘बहुजन’ कहा गया। पार्टी का चुनाव चिह्न हाथी है। 2001 में कांशीराम ने मायावती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
गठबंधन की सरकारें: 1993 से 2003
बसपा का इतिहास बताता है कि 1989 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 13 सीटें जीतीं। 1993 में सपा के साथ गठबंधन में उसे 67 सीटें मिलीं और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। 2 जून 1995 को बसपा ने समर्थन वापस ले लिया।
इसके बाद मायावती 3 जून 1995 को भाजपा के समर्थन से पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। वे 1997 और 2002 में भी गठबंधन सरकार की मुखिया रहीं। ये तीनों सरकारें कुछ महीनों से लेकर करीब सवा साल तक चलीं।
2007: बसपा का इतिहास बदलने वाला चुनाव
2007 का विधानसभा चुनाव बसपा के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ रहा। पार्टी ने 403 में से 206 सीटें जीतीं और उसे 30.43% वोट मिले। 1991 के बाद पहली बार किसी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला था।
इस जीत में दलित वोटों के साथ सवर्ण और दूसरे वर्गों का समर्थन भी अहम माना गया। मायावती 13 मई 2007 को चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं। उनकी सरकार यूपी की पहली सरकार बनी जिसने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

गिरावट का दौर: 2012 से 2024
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बसपा की सीटें 2012 में 80 और 2017 में 19 रह गईं। 2022 में पार्टी ने सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा। उसे सिर्फ 1 सीट और 12.88% वोट मिले। विस्तृत आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 की रिपोर्ट में हैं।
लोकसभा में भी बसपा का इतिहास इसी तरह के उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2009 में बसपा ने यूपी से 20 सीटें जीती थीं। 2014 में पार्टी खाता नहीं खोल पाई। 2019 में सपा और रालोद के साथ गठबंधन में उसे 10 सीटें मिलीं।
2024 में बसपा अकेले लड़ी और यूपी में कोई सीट नहीं जीत सकी। चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में उसका वोट 9.39% रहा।
उत्तराधिकार और संगठन
दिसंबर 2023 में मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित किया था। मई 2024 में उनसे यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई। पार्टी में उनकी वापसी पर हमारी रिपोर्ट आकाश आनंद की बसपा में वापसी पढ़ें।
विश्लेषण: बसपा का इतिहास 2027 के लिए क्या कहता है
बसपा का इतिहास दिखाता है कि पार्टी ने सबसे बड़ी जीत तब पाई जब उसका सामाजिक आधार दलित वोटों से आगे बढ़ा। 2022 में 12.88% वोट मिलने के बावजूद सीटें नहीं आईं। 2027 में पार्टी के लिए वोट को सीटों में बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी। संगठन में हाल के बदलावों पर मायावती का नया संगठनात्मक ढांचा देखें।


