चुनाव आयोग और SIR पर जारी सियासी घमासान के बीच 42 पूर्व जजों ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर गहरी चिंता जताई गई है। इंडिया टीवी के मुताबिक, पत्र में बिना सबूत लगाए जा रहे “वोट चोरी” के आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। यह पत्र उस दिन सामने आया, जब विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया।
किन पूर्व जजों ने लिखा पत्र?
न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार, पत्र पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हेमंत गुप्ता और पंकज मित्तल के हस्ताक्षर हैं। हस्ताक्षर करने वालों में तीन हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.सी. पटेल शामिल हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट के सुब्रो कमल मुखर्जी और सिक्किम हाईकोर्ट के प्रमोद कोहली भी सूची में हैं।
IANS के मुताबिक, बाकी हस्ताक्षरकर्ताओं में अलग-अलग हाईकोर्ट के पूर्व जज और वैधानिक संस्थाओं व नियामकों के पूर्व सदस्य हैं। द हिंदू ने भी इन नामों की जानकारी दी है। इंडिया टीवी न्यूज के अनुसार, पूर्व जजों ने लिखा कि ऐसे समय में चुप रहना अब तटस्थ विकल्प नहीं है।
पत्र में पूर्व जजों ने क्या कहा?
पूर्व जजों ने एक अहम चेतावनी दी। उनके मुताबिक, संस्थाओं को बार-बार चोर और मिलीभगत वाला बताने से जनता का भरोसा घट सकता है। उनके मुताबिक, संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना नहीं। पत्र में कहा गया है कि भरोसा ही लोकतंत्र की असली पूंजी है। चुनावों की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिशें अशांति फैला सकती हैं। इससे अराजक तत्वों का हौसला भी बढ़ सकता है।
द हिंदू के मुताबिक, पत्र में बिना नाम लिए एक पार्टी पर निशाना साधा गया। पत्र के मुताबिक, पांच दशक से ज्यादा राज करने वाली पार्टी अब उसी व्यवस्था पर धांधली का आरोप लगा रही है, जिसने उसे चुना। इसके अलावा, चुनिंदा मुकदमेबाजी करने वाले एक्टिविस्ट संगठनों की भी आलोचना की गई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर इशारा माना है।
पूर्व जजों ने राजनीतिक दलों से शिकायतें आयोग और अदालतों के जरिए उठाने की अपील की। वहीं, मीडिया से दावों की पुष्टि करने और प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने को कहा।
SIR को बताया कानूनी प्रक्रिया
पत्र में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का खुलकर बचाव किया गया है। पूर्व जजों के मुताबिक, यह साफ और सही वोटर लिस्ट तय करने की कानूनी प्रक्रिया है। SIR से जुड़ी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
राजघाट पर विपक्ष का धरना
दूसरी ओर, गुरुवार को विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। इंडिया टीवी के मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेता कनॉट प्लेस से तीन बसों में राजघाट के लिए निकले। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने वहां INDIA गठबंधन के सांसदों को लंच दिया था।
रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने कहा, “राज्यसभा और लोकसभा के लगभग 300 सांसद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पहले दिन, हमें चुनाव आयोग के बाहर रोका गया। अब हमें जंतर-मंतर पर जाने से रोका गया है।”
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस बार दिल्ली पुलिस ने विपक्षी नेताओं को राजघाट तक जाने दिया। वहां नेताओं ने कुछ देर धरना दिया और फिर लौट गए। पिछले दो दिनों की तरह लंबा टकराव या सामूहिक हिरासत नहीं हुई। UNI के अनुसार, धरने में खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद थे। TMC, RJD और सपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे। कांग्रेस ने एक्स पर लिखा कि सांसदों ने बापू को नमन कर शांतिपूर्वक धरना दिया।
पूर्व जजों के पत्र पर विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस खबर के लिखे जाने तक पूर्व जजों के इस पत्र पर कांग्रेस की कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि, उसी दिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक अन्य पूर्व जज की टिप्पणी का हवाला दिया। ये सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी. गोपाल गौड़ा हैं। द टेलीग्राफ के मुताबिक, गौड़ा ने SIR फैसले को वापस लेने की मांग की है। खेड़ा ने एक्स पर लिखा कि इससे विपक्ष के दावे को न्यायिक विश्वसनीयता मिलती है।
इसके अलावा, NDTV के अनुसार, इसी हफ्ते पूर्व जज रोहिंटन नरीमन ने भी चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताई थी।
विश्लेषण: न्यायिक हलकों में भी बंटी राय
42 पूर्व जजों का पत्र और गौड़ा-नरीमन की टिप्पणियां एक बात साफ करती हैं। SIR पर बहस अब सिर्फ दलों तक सीमित नहीं रही। सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी इस पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। लेकिन विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अपना रुख नहीं बदला है। इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा अदालत और सड़क, दोनों जगह गरम रह सकता है।
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