लखनऊ मध्य विधानसभा सीट राजधानी के पुराने और व्यावसायिक इलाकों की सीट है। 1989 से 2007 तक यहां भाजपा लगातार जीती। 2012 के बाद यह सीट हर चुनाव में सपा और भाजपा के बीच बदलती रही है। इस लेख के सभी आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्टों से हैं।
लखनऊ मध्य विधानसभा सीट की पहचान
2008 के परिसीमन के बाद इस सीट का क्रमांक 174 है। इससे पहले इसका क्रमांक 103 और फिर 87 था। परिसीमन में सीट की सीमाएं भी बदलीं। 2022 में यहां 3,70,629 मतदाता थे और 56.81% मतदान हुआ।
शुरुआती दौर
1967 में भारतीय जनसंघ और 1969 में भारतीय क्रांति दल जीता। 1974 में कांग्रेस और 1977 में जनता पार्टी के राम प्रकाश को जीत मिली। 1980 में कांग्रेस (आई) और 1985 में कांग्रेस यहां से जीती। 1985 में कांग्रेस के नरेश चंद्र को 61.20% वोट मिले थे, जबकि भाजपा 14.01% पर थी।
भाजपा के छह चुनाव
1989 और 1991 में भाजपा के बसंत लाल गुप्ता जीते। 1993 में भाजपा के राम प्रकाश विधायक बने। 1996, 2002 और 2007 में भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव जीते। 2007 में उन्होंने सपा के रविदास मेहरोत्रा को सिर्फ 3,910 वोटों से हराया।
इस दौर में भाजपा का वोट शेयर बहुत ऊंचा रहा। 1991 में बसंत लाल गुप्ता को 56.15% वोट मिले। 1993 में राम प्रकाश ने 54.06% वोट लेकर सपा के विनोद बिहारी वर्मा को 22,118 वोटों से हराया। 1996 में लखनऊ मध्य विधानसभा सीट पर सुरेश कुमार श्रीवास्तव को 59.21% वोट मिले और जीत का अंतर 36,167 वोट रहा। 2007 तक यह बढ़त घटकर कुछ हजार वोट रह गई।
2012 के बाद अदला-बदली
2012 में लखनऊ मध्य विधानसभा सीट पर सपा के रविदास मेहरोत्रा को 62,622 वोट (37.05%) मिले। उन्होंने भाजपा के विद्या सागर गुप्ता को 22,732 वोटों से हराया। कांग्रेस के फाखिर सिद्दीकी 21.08% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017 में भाजपा के ब्रजेश पाठक ने 78,400 वोट (40.37%) हासिल किए। उन्होंने रविदास मेहरोत्रा को 5,094 वोटों से हराया। ब्रजेश पाठक बाद में 2022 में लखनऊ कैंट से लड़े और उपमुख्यमंत्री बने।
2022 का नतीजा
2022 में रविदास मेहरोत्रा को 1,04,488 वोट (49.62%) मिले। भाजपा के रजनीश कुमार गुप्ता को 93,553 वोट (44.43%) मिले। अंतर 10,935 वोट रहा। बसपा सिर्फ 2.94% पर सिमटी। पूरे आंकड़े चुनाव आयोग की 2022 रिपोर्ट में हैं।
विश्लेषण: 2027 में लखनऊ मध्य विधानसभा सीट
पिछले तीन चुनावों में यहां मुकाबला सिमटकर सपा और भाजपा तक आ गया। 2012 में दोनों दलों का कुल वोट करीब 61% था। 2022 में यह 94% से ज्यादा हो गया। बसपा का हिस्सा 2017 के 12.52% से घटकर 2.94% रह गया।
मतदान भी बढ़ा है। यह 2012 में 50.91%, 2017 में 53.15% और 2022 में 56.81% रहा। 2012 के बाद से हर चुनाव में यहां जीतने वाला दल बदला है। 2027 में लखनऊ मध्य विधानसभा सीट पर यह रुझान जारी रहता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सांख्यिकीय रिपोर्टें (1967 से 2022)।


