मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस असंतोष की वजह से जम्मू कश्मीर के राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी आ गई है। पार्टी के कई जनप्रतिनिधि वर्तमान कार्यप्रणाली को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। संगठन और शासन स्तर पर नए लोगों को स्थान देने की आवाज बुलंद होने लगी है। नेतृत्व अब इन मतभेदों को शांत करने के लिए संभावित विकल्पों की तलाश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब अठारह से बीस विधायकों ने दल के भीतर व्यापक बदलाव की मांग सामने रखी है। इन विधायकों का कहना है कि वे पार्टी के वर्तमान कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं। उनकी मुख्य मांगों में पुराने मंत्रियों के स्थान पर नए चेहरों को अवसर देना शामिल है। इसके अलावा दल के सांगठनिक ढांचे को भी पुनर्गठित करने पर जोर दिया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस अंदरूनी स्थिति से निपटने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने असंतुष्ट सदस्यों से संवाद स्थापित किया है। पार्टी के आला नेता लगातार विधायकों के साथ बैठकें कर रहे हैं। संवाद प्रक्रिया के दौरान जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को दूर करने का भरोसा दिलाया गया है। इस कदम से आंतरिक कलह पर विराम लगाने की कोशिश की जा रही है।
असंतोष दूर करने के उपाय
रिपोर्ट के मुताबिक असंतुष्टों को शांत करने के लिए एक निश्चित समयसीमा के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार का प्रस्ताव दिया गया है। विधायकों को बताया गया है कि लगभग अठारह महीने बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा। इस बदलाव के माध्यम से नए चेहरों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रशासनिक सहयोग के लिए दो अतिरिक्त सलाहकारों को नियुक्त करने की भी सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त परामर्शदाताओं की भूमिका पर पुनर्विचार की बात सामने आ रही है। असंतुष्ट नेताओं का मानना है कि इन नियुक्तियों से कार्यप्रणाली में संतुलन स्थापित हो सकेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। पार्टी नेतृत्व असंतोष को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विचार विमर्श जारी रखे हुए है। आगामी समय में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर होने वाले निर्णयों के आधार पर भावी दिशा तय होगी।
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स्रोत: इंडिया टीवी; आज तक
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