Nitin Nabin on SIR: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर आधिकारिक बयान आने के बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आयोग को घेरने के लिए गढ़े हुए झूठ को आधार बनाया। एक्स पर लिखते हुए नवीन ने कहा कि एसआईआर के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश में विपक्ष फिर बेनकाब हुआ है।
आयोग ने शनिवार को कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए। मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में हुए बदलाव सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखे। भाजपा इसी बयान को अपने पलटवार का आधार बना रही है। विपक्ष आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाता रहा है।
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| विवाद | एसआईआर और चुनाव आयुक्तों की सहमति |
| आयोग का दावा | सभी फैसले तीन आयुक्तों की सर्वसम्मति से |
| भाजपा अध्यक्ष | नितिन नवीन |
| आरोप कांग्रेस पर | मनगढ़ंत झूठ और संस्थाओं पर हमला |
| बैठक | 26 सितंबर, निर्वाचन सदन, नई दिल्ली |
Nitin Nabin on SIR: नितिन नवीन ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
नवीन का कहना है कि आयोग साफ कर चुका है कि एसआईआर का हर फैसला सर्वसम्मति से हुआ। इसके बावजूद कांग्रेस ने झूठ के आधार पर आरोप लगाए और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके मुताबिक जीत-हार लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता तोड़ने के लिए दुष्प्रचार ठीक नहीं।
यह भाषा तीखी है। कांग्रेस राहुल गांधी के जरिए वोट चोरी और आयोग की स्वतंत्रता का मुद्दा उठा रही है। भाजपा उसे हार का ठीकरा आयोग पर फोड़ने वाली पार्टी बता रही है। दोनों पक्ष एक ही संस्था को अपने तर्क का केंद्र बना रहे हैं। आयोग के बयान के बाद भाजपा को हमले का मौका मिला है। कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष द्वारा आयोग की ढाल बनाने वाला कदम कह सकती है।
चुनाव आयोग ने बयान में क्या कहा?
26 सितंबर को दोपहर तीन बजे निर्वाचन सदन में आयोग की बैठक हुई। महानिदेशक मीडिया आशीष गोयल ने बयान जारी किया। आयोग का दावा है कि मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रिया के साथ लिए गए। फॉर्म-6 वाले बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा, यह भी बयान का हिस्सा रहा।
यह स्पष्टीकरण उन खबरों के जवाब में आया जिनमें दो आयुक्तों की असहमति बताई गई थी। विपक्ष उसी असहमति को अपने आरोपों से जोड़ रहा था। आयोग अब कह रहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति के थे। कानूनी रूप से बहुमत या सर्वसम्मति की प्रक्रिया आयोग के अंदर तय होती है। सार्वजनिक बहस में यही बिंदु सबसे विवादास्पद है। सहमति कितनी औपचारिक थी और असहमति कितनी दर्ज हुई, यह दस्तावेजों से और साफ हो सकता है।
Nitin Nabin on SIR: भाजपा का केरल-तमिलनाडु वाला तर्क क्या है?
नितिन नवीन ने कांग्रेस और सहयोगियों पर पाखंड का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब यही चुनावी प्रक्रिया केरल और तमिलनाडु में उन्हें जीत दिलाती है तो वे इसकी विश्वसनीयता मान लेते हैं। जब दूसरे राज्यों में जनादेश खिलाफ जाता है तो उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। लोकतंत्र का सम्मान चुनिंदा नहीं हो सकता।
यह पुराना राजनीतिक तर्क है। सत्ता पक्ष हर बार कहता है कि जीत वैध, हार में मशीन संदिग्ध। विपक्ष कहता है कि सवाल प्रक्रिया पर हैं, नतीजे पर नहीं। केरल और तमिलनाडु का उदाहरण भाजपा इसलिए उठाती है क्योंकि वहां विपक्ष की सरकारें रही हैं। कांग्रेस जवाब में कह सकती है कि एसआईआर और वोटर सूची संशोधन का मौजूदा विवाद उन पुराने चुनावों से अलग है। बहस यहीं अटकती है। एक तरफ संस्था का बचाव, दूसरी तरफ प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग।
एसआईआर विवाद क्यों थमा नहीं?
विशेष गहन पुनरीक्षण वोटर सूची साफ करने की प्रक्रिया है। नाम जुड़ना और कटना दोनों इसमें होते हैं। विपक्ष आरोप लगाता है कि बड़ी संख्या में वोटर प्रभावित हुए और फैसले संदिग्ध हैं। ज्ञानेश कुमार पर व्यक्तिगत हमले भी हुए। इस्तीफे और महाभियोग की चर्चा चली। आयोग अब सर्वसम्मति और अदालत के आदेश का हवाला दे रहा है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में आपत्ति दाखिल करने की तारीख बढ़ाने जैसी राहत भी आयोग ने दी है। इससे प्रक्रिया जारी है, विवाद भी जारी है। भाजपा आयोग के बयान को विपक्ष की पोल खुलने जैसा प्रचारित कर रही है। कांग्रेस इसे पर्याप्त जवाब नहीं मानेगी। संसद और सड़क दोनों जगह मुद्दा गरम रह सकता है।
Nitin Nabin on SIR: आगे क्या होगा?
नितिन नवीन का हमला बताता है कि भाजपा एसआईआर को कांग्रेस के झूठ वाले खाते में डालना चाहती है। आयोग का बयान उसके लिए ढाल बना है। कांग्रेस राहुल गांधी वाली लाइन पर आरोप जारी रख सकती है। दोनों तरफ से संवैधानिक संस्था का सम्मान और हमला एक साथ दिख रहा है।
तथ्य इतना है कि आयोग ने सर्वसम्मति का दावा किया है। फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बयान में है। बाकी आरोप राजनीतिक हैं। वोटर सूची के आंकड़े, राज्यवार कटौती और जोड़ और असहमति के कागजात जितने पारदर्शी होंगे, बहस उतनी तथ्यों पर आएगी। फिलहाल नितिन नवीन ने साफ कह दिया है कि कांग्रेस ने मनगढ़ंत झूठ से संस्था पर हमला किया। कांग्रेस इसे सत्ता का बचाव बताएगी। जनता और अदालत के सामने दोनों दावे अभी खुले हैं।
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फीचर्ड फोटो (फाइल): Nitin Nabin, National President of Bharatiya Janata Party meeting with the President of India, Droupadi Murmu at Rashtrapati Bhavan (2025) (cropped).jpg, President Secretariat (Rashtrapati Bhavan), Wikimedia Commons, GODL-India लाइसेंस के तहत; 1280×720 में क्रॉप/रीसाइज़ किया गया।


