मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सांकेतिक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को नकली संसद का नाम दिया गया, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर संपन्न हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह गंभीर आरोप दर्ज कराए। इन आरोपों में चुनावी प्रणाली में गड़बड़ी और लगभग तेरह करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने जैसे बड़े मुद्दे शामिल किए गए।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद संबित पात्रा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने यह बयान दिया कि जवाहरलाल नेहरू ने पहली वोट चोरी की थी। इस राजनीतिक घमासान के बीच आगे की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
विपक्ष के आरोपों पर सत्तारूढ़ दल का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पूरे विवाद और एसआईआर तथा सीईसी से जुड़े मुद्दों के बीच कांग्रेस पार्टी के सामने कुछ बुनियादी सवाल रखे। उन्होंने वर्ष दो हजार चौबीस के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए यह सवाल किया कि जब ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग के प्रमुख नहीं थे, तब भी कांग्रेस को लगातार तीसरी बार हार का सामना क्यों करना पड़ा था।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे इस टकराव के दौरान विभिन्न नेताओं की तरफ से बयान सामने आए हैं। चुनाव प्रणाली और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस मामले से जुड़े अन्य घटनाक्रमों पर सभी की निगाहें टिकी होने की बात अभी सामने नहीं आई है, और आगामी घटनाक्रम की आधिकारिक सूचना का इंतजार है।
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स्रोत: प्रभात खबर; आज तक; द हिंदू
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