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राष्ट्रीय राजनीति

दिल्ली की विपक्षी रैली और व्यापारिक नुकसान पर सियासी घमासान

दिल्ली में विपक्षी रैली को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने आ गए हैं।

दिल्ली में विपक्षी रैली और राजनीतिक बयानबाजी का ग्राफिक
ग्राफिक: UP Election News

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी गठबंधन की महारैली को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि सत्ता पक्ष ने इस आयोजन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस राजनीतिक टकराव के बीच राजधानी के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ने की बात सामने आई है, जिससे कारोबारी वर्ग में चिंता बढ़ गई है।

खबरों के अनुसार, रामलीला मैदान में हुई इस सभा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने लोकतंत्र बचाने के लिए प्रधानमंत्री को हटाने की बात कही। इस कार्यक्रम पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता संबित पात्रा ने सभा में जुटने वाली भीड़ के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए और कहा कि मैदान में हजारों कुर्सियां खाली पड़ी थीं।

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दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ से विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए विपक्ष को आगामी पांच साल तक बैठने के लिए तैयार रहने की बात कही। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस प्रदर्शन को राजनीतिक भविष्य के ताबूत में आखिरी कील करार दिया और इसे लोकतंत्र को अराजकता के हवाले करने की साजिश बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस आयोजन की आलोचना की और सड़कों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने राष्ट्रकवि की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए तीखा तंज कसा। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए यातायात प्रतिबंधों के कारण राजधानी का व्यापारिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

व्यापार पर असर और आगे की स्थिति

व्यापारिक संगठनों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, आयोजन और यातायात पाबंदियों की वजह से राजधानी के प्रमुख बाजारों में अस्सी प्रतिशत तक दुकानें बंद रहीं। इस स्थिति के चलते व्यापारियों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जिसका आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक बताया गया है।

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इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर और तीखे तेवर देखने को मिल सकते हैं, जिसकी विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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स्रोत: द हिंदू; आज तक; प्रभात खबर

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