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यूपी राजनीति

पंचायत चुनाव के पद: प्रधान, BDC और जिला पंचायत सदस्य, कौन कैसे चुना जाता है

यूपी के पंचायत चुनाव में एक ग्रामीण मतदाता एक साथ चार वोट डालता है। कौन से पद सीधे चुने जाते हैं और कौन से अप्रत्यक्ष, आसान भाषा में पूरी जानकारी।

पंचायत चुनाव के पद विषय का ग्राफिक
ग्राफिक: UP Election News

पंचायत चुनाव के पद तीन स्तरों में बंटे हैं: ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत। यूपी में पंचायत चुनाव के दिन एक ग्रामीण मतदाता एक साथ चार पदों के लिए वोट डालता है। कुछ बड़े पद अप्रत्यक्ष चुनाव से भरे जाते हैं। यह लेख संविधान और यूपी के पंचायत कानूनों पर आधारित है।

पंचायत चुनाव के पद: सीधे चुने जाने वाले चार पद

1. ग्राम प्रधान

ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत का मुखिया होता है। गांव के सभी पंजीकृत मतदाता उसे सीधे चुनते हैं। उसके अधिकार और जिम्मेदारियां उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 में तय हैं।

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2. ग्राम पंचायत सदस्य

हर ग्राम पंचायत कई वार्डों में बंटी होती है। हर वार्ड से एक सदस्य चुना जाता है। ये सदस्य प्रधान के साथ मिलकर ग्राम पंचायत बनाते हैं और बैठकों में फैसले लेते हैं।

3. क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC)

क्षेत्र पंचायत ब्लॉक स्तर पर बनती है। इसके सदस्यों को आम बोलचाल में BDC कहा जाता है। ये सदस्य आगे चलकर ब्लॉक प्रमुख चुनते हैं।

4. जिला पंचायत सदस्य

जिला पंचायत जिले के ग्रामीण इलाके की सबसे ऊपर की पंचायत है। हर जिले को कई वार्डों में बांटा जाता है और हर वार्ड से एक सदस्य चुना जाता है।

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अप्रत्यक्ष चुनाव वाले पद

कुछ पंचायत चुनाव के पद सीधे जनता नहीं चुनती। इन्हें निर्वाचित सदस्य अपने बीच से चुनते हैं:

इनके अलावा उप-प्रमुख और उपाध्यक्ष जैसे पद भी राज्य कानून के तहत भरे जाते हैं।

पंचायत चुनाव के पद और आरक्षण

संविधान के अनुच्छेद 243D के अनुसार सीधे चुने जाने वाले सदस्यों की सीटों और अध्यक्ष पदों, दोनों पर आरक्षण लागू होता है। SC और ST के लिए आरक्षण आबादी के अनुपात में होता है। कम से कम एक-तिहाई सीटें और पद महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं। यूपी में पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण है। आरक्षण चक्रानुक्रम से बदलता है।

कार्यकाल

सभी पंचायत चुनाव के पद एक तय अवधि के लिए होते हैं। अनुच्छेद 243E के अनुसार हर पंचायत का कार्यकाल पहली बैठक से पांच साल का होता है। कार्यकाल खत्म होने से पहले नया चुनाव कराना जरूरी है। अगर पंचायत भंग हो, तो छह महीने के भीतर चुनाव कराना होता है।

विश्लेषण: चार वोट, चार फैसले

एक ही दिन चार अलग पदों के लिए वोट डालना मतदाता के लिए जटिल हो सकता है। पंचायत चुनाव के पद अलग-अलग स्तर के हैं, इसलिए हर वोट का असर भी अलग स्तर पर पड़ता है। प्रधान का फैसला गांव पर, BDC का ब्लॉक पर और जिला पंचायत सदस्य का पूरे जिले की योजनाओं पर असर डालता है। मतदाता को पहले से अपने वार्ड और उम्मीदवारों की जानकारी रखनी चाहिए। विभाग की जानकारी पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर है।

यह भी पढ़ें: पंचायत चुनाव में उम्मीदवार की योग्यता

स्रोत: भारत का संविधान, अनुच्छेद 243B, 243C, 243D और 243E; उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947; उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961।

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