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राष्ट्रीय राजनीति

मुख्य निर्वाचन आयुक्त की छूट और मतदाता पंजीकरण पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयुक्तों की आजीवन कानूनी सुरक्षा और मतदाता सूची विवाद पर जवाब मांगा गया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त की छूट और मतदाता पंजीकरण पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका से संबंधित चित्र
ग्राफिक: UP Election News

रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वर्ष 2023 के अधिनियम की धारा 16 को चुनौती दी है। इस कानून के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को आजीवन पूर्ण सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। इसके साथ ही दिल्ली में मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के पंजीकरण से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार याचिकाकर्ता ने द मुख्य इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स अधिनियम 2023 के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। इस कानून की धारा 16 के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से स्थायी संरक्षण प्राप्त होता है। याचिका में इस प्रकार की असीमित सुरक्षा देने की वैधता को परखने की मांग की गई है, जिस पर अदालत ने संबंधित पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है।

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दूसरी तरफ दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए नागरिकों के संबंध में भी अदालत में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक निर्वाचन आयोग अभी भी हटाए गए मतदाताओं से नए आवेदक के रूप में फॉर्म 6 भरवा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले को प्राथमिकता से उठाया है।

मतदाता सूची और कानूनी प्रक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक स्पष्ट रुख में कहा था कि निर्वाचन आयोग की यह प्रक्रिया गलत है। अदालत के अनुसार जो लोग पहले से पंजीकृत मतदाता थे और जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, उन्हें रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के फॉर्म 6 के तहत नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

इसके बावजूद निर्वाचन आयोग द्वारा पुराने मतदाताओं से फॉर्म 6 जमा कराने की जिद के कारण याचिकाकर्ताओं को दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। इस मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार है क्योंकि अदालत के अंतिम निर्देशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। चुनाव आयोग की कार्रवाई और नए नियमों के असर को लेकर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

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स्रोत: द हिंदू

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