उत्तर प्रदेश में गठबंधन सरकारों का दौर 1993 के विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ। अगले करीब नौ साल में किसी एक दल को अकेले बहुमत नहीं मिला। इस बीच छह नेता मुख्यमंत्री बने। इस लेख के आंकड़े चुनाव आयोग और उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से हैं।
1993: त्रिशंकु विधानसभा
1993 में भाजपा 177 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनी। उसे 33.30% वोट मिले। सपा को 109 सीटें और 17.94% वोट मिले। बसपा 164 सीटों पर लड़ी और 67 जीतीं। कांग्रेस को 28 और जनता दल को 27 सीटें मिलीं।
425 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 213 सीटें चाहिए थीं। भाजपा इससे 36 सीट पीछे रह गई। 4 दिसंबर 1993 को मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। उनकी सरकार सपा और बसपा के तालमेल पर टिकी थी।
गठबंधन सरकारों का दौर: मुख्यमंत्रियों की सूची
विधानसभा के रिकॉर्ड में इस दौर के कार्यकाल इस तरह दर्ज हैं:
- मुलायम सिंह यादव: 4 दिसंबर 1993 से 3 जून 1995।
- मायावती: 3 जून 1995 से 18 अक्टूबर 1995।
- मायावती: 21 मार्च 1997 से 20 सितंबर 1997।
- कल्याण सिंह: 21 सितंबर 1997 से 12 नवंबर 1999।
- राम प्रकाश गुप्त: 12 नवंबर 1999 से 28 अक्टूबर 2000।
- राजनाथ सिंह: 28 अक्टूबर 2000 से 8 मार्च 2002।
इन छह में से तीन मुख्यमंत्री भाजपा के थे। मायावती दो बार और मुलायम सिंह यादव एक बार इस दौर में पद पर रहे। सबसे लंबा कार्यकाल कल्याण सिंह का रहा, जो दो साल से ज्यादा चला। मायावती का 1995 वाला पहला कार्यकाल करीब साढ़े चार महीने का था।
1996: फिर किसी को बहुमत नहीं
1996 के चुनाव में भाजपा को 174 सीटें और 32.52% वोट मिले। सपा 110 सीटों और 21.80% वोट के साथ दूसरे नंबर पर रही। बसपा की सीटें 67 ही रहीं, लेकिन उसका वोट शेयर 11.12% से बढ़कर 19.64% हो गया। कांग्रेस 126 सीटों पर लड़ी और 33 जीतीं।
नतीजे फिर त्रिशंकु रहे। मार्च 1997 में मायावती दूसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। सितंबर 1997 में कल्याण सिंह ने पद संभाला। इसके बाद भाजपा के ही तीन नेता बारी-बारी से मुख्यमंत्री बने। गठबंधन सरकारों का दौर इसी तरह अस्थिर कार्यकालों से भरा रहा।
वोट शेयर बनाम सीटें
गठबंधन सरकारों का दौर एक दिलचस्प तस्वीर भी दिखाता है। 1993 और 1996 दोनों बार भाजपा का वोट शेयर 32% से ऊपर था। फिर भी वह बहुमत से दूर रही। वजह यह थी कि सपा और बसपा के उभार ने मुकाबले को तीन-तरफा बना दिया था।
दौर का अंत
2002 के चुनाव के बाद भी किसी को बहुमत नहीं मिला। मई 2002 में मायावती तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। गठबंधन सरकारों का दौर असल में 2007 में खत्म हुआ, जब बसपा ने 206 सीटें जीतकर अकेले बहुमत हासिल किया। उसके बाद 2012, 2017 और 2022 में भी प्रदेश को पूर्ण बहुमत वाली सरकारें मिलीं।
यूपी में गठबंधन सरकारों का दौर अब भी चुनावी चर्चा में उदाहरण की तरह लिया जाता है। पूरे चुनावी आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
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स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सांख्यिकीय रिपोर्टें (1993, 1996, 2002, 2007); उत्तर प्रदेश विधानसभा का आधिकारिक रिकॉर्ड।


