यूपी चुनाव 2002 के नतीजे: सपा 143 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल, बसपा 98 और भाजपा 88; किसी को बहुमत नहीं

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समझौते का दस्तावेज सौंपते मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) / Wikimedia Commons, लाइसेंस: GODL-India (2005, नई दिल्ली)

संक्षेप में

  • में सपा को 143, बसपा को 98, भाजपा को 88 और कांग्रेस को 25 सीटें मिलीं।
  • सदस्यों वाली विधानसभा में किसी दल को बहुमत के लिए जरूरी 202 सीटें नहीं मिलीं।
  • मतदान 53.80% रहा; 5,533 उम्मीदवारों में से 4,422 की जमानत जब्त हुई।
  • चुनाव के बाद पहले मायावती और फिर 2003 में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने।

यूपी चुनाव 2002 के नतीजे त्रिशंकु विधानसभा लेकर आए। समाजवादी पार्टी 143 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी, लेकिन बहुमत से काफी दूर रही। 403 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिए थीं। इस लेख के चुनावी आंकड़े चुनाव आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्ट से हैं।

किस दल को कितनी सीटें

  • सपा: 143 सीटें, 25.37% वोट।
  • बसपा: 98 सीटें, 23.06% वोट।
  • भाजपा: 88 सीटें, 20.08% वोट।
  • कांग्रेस: 25 सीटें, 8.96% वोट।
  • रालोद: 14 सीटें, 2.48% वोट।
  • निर्दलीय: 16 सीटें, 7.67% वोट।

राष्ट्रीय क्रांति पार्टी को 4 और अपना दल को 3 सीटें मिलीं। माकपा, जद (यू) और अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस को 2-2 सीटें मिलीं। कुछ और छोटे दलों ने एक-एक सीट जीती।

वोट और सीट का गणित

यूपी चुनाव 2002 के नतीजे दिखाते हैं कि तीन बड़े दलों के बीच वोट का अंतर कम था। सपा और बसपा में करीब 2.3 अंक और बसपा और भाजपा में करीब 3 अंक का फर्क था। फिर भी सपा को बसपा से 45 सीटें ज्यादा मिलीं।

बसपा ने 401 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। सपा 390 और भाजपा 320 सीटों पर लड़ी। कांग्रेस ने 402 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसके 334 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई। रालोद सिर्फ 38 सीटों पर लड़ी और 14 जीतीं।

राष्ट्रीय क्रांति पार्टी

राष्ट्रीय क्रांति पार्टी ने 335 उम्मीदवार उतारे और 3.38% वोट लिए। 4 सीटें जीतने के बावजूद उसका वोट शेयर रालोद से ज्यादा था। यह पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने भाजपा से अलग होने के बाद बनाई थी।

1996 से तुलना

1996 में विधानसभा में 425 सीटें थीं। 2000 में उत्तराखंड बनने के बाद यह संख्या 403 रह गई। 1996 में भाजपा 174 सीटों और 32.52% वोट के साथ सबसे बड़ा दल थी। यूपी चुनाव 2002 के नतीजे में उसका वोट शेयर करीब 12 अंक गिरा। सपा 110 से बढ़कर 143 और बसपा 67 से बढ़कर 98 सीटों पर पहुंची।

यूपी चुनाव 2002 के नतीजे: मतदान और उम्मीदवार

प्रदेश में 9,97,56,327 मतदाता थे और मतदान 53.80% रहा। पुरुषों का मतदान 56.72% और महिलाओं का 50.25% था। कुल 1,17,052 मतदान केंद्र बनाए गए।

मैदान में 5,533 उम्मीदवार थे, यानी हर सीट पर औसतन 14। इनमें से 4,422 की जमानत जब्त हुई। 344 महिला उम्मीदवारों में से 26 जीतीं। तब 314 सीटें सामान्य और 89 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं।

चुनाव के बाद की सरकारें

यूपी चुनाव 2002 के नतीजे में किसी दल को बहुमत न मिलने पर प्रदेश में कुछ समय राष्ट्रपति शासन रहा। 3 मई 2002 को बसपा की मायावती ने भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह गठबंधन ज्यादा नहीं चला। 29 अगस्त 2003 को सपा के मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने और 2007 तक पद पर रहे।

विश्लेषण

यूपी चुनाव 2002 के नतीजे यूपी की बहुकोणीय राजनीति का साफ उदाहरण हैं। 20 से 25% वोट वाले तीन दल थे और कोई भी अकेले सरकार नहीं बना सका। 2007 में बसपा ने करीब 30% वोट लेकर यह स्थिति बदली। पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर है।

यह भी पढ़ें: बसपा का इतिहास | यूपी चुनाव 2022 के नतीजे

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव 2002 की सांख्यिकीय रिपोर्ट।

स्रोत

  1. ECI: Statistical Report on General Election, 2002 to the Legislative Assembly of Uttar Pradesh
  2. Wikimedia Commons: Mulayam Singh Yadav submitting the signed MoU to PM Manmohan Singh (Ken-Betwa)

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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