राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव कैसे होते हैं: यूपी की 31 राज्यसभा और 100 MLC सीटों का पूरा तरीका

ऊपर से दिखता नई दिल्ली का नया संसद भवन और आसपास की इमारतें
Ministry of Parliamentary Affairs, भारत सरकार / Wikimedia Commons, लाइसेंस: GODL-India (नया संसद भवन, नई दिल्ली)

संक्षेप में

  • उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 31 सीटें हैं, जिनके सदस्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक चुनते हैं।
  • यूपी विधान परिषद में 100 सदस्य हैं: 38 विधायकों से, 36 स्थानीय निकायों से, 8-8 स्नातक और शिक्षक क्षेत्रों से और 10 मनोनीत।
  • दोनों चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होते हैं।
  • राज्यसभा चुनाव में खुला मतपत्र होता है और दोनों सदनों के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल होता है।

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव आम विधानसभा चुनाव से काफी अलग होते हैं। इनमें आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालते। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 31 सीटें हैं और विधान परिषद में 100 सदस्य होते हैं। इस लेख में दोनों चुनावों की पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में है।

राज्यसभा: यूपी की 31 सीटें

संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक, राज्यसभा में राज्यों के प्रतिनिधि विधानसभा के निर्वाचित सदस्य चुनते हैं। यूपी के 403 विधायक इसके मतदाता हैं। मनोनीत सदस्य इसमें वोट नहीं डालते।

राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 साल होता है। हर दो साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं, इसलिए चुनाव भी किस्तों में होते हैं। उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 30 साल होनी चाहिए।

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में वोट कैसे गिने जाते हैं

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होते हैं। विधायक उम्मीदवारों को 1, 2, 3 के क्रम में वरीयता देते हैं।

जीत के लिए एक तय कोटा चाहिए। कोटा निकालने का तरीका है: कुल वैध वोटों को सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग दें और नतीजे में एक जोड़ें। गिनती में हर वोट का मूल्य 100 माना जाता है। मान लें कि 10 सीटों पर चुनाव है और सभी 403 विधायक वोट डालते हैं। तब एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के पहली वरीयता वोट चाहिए।

खुला मतपत्र

राज्यसभा चुनाव में खुला मतपत्र होता है। किसी दल का विधायक वोट डालने के बाद अपना मतपत्र पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाता है। यह नियम क्रॉस वोटिंग पर नजर रखने के लिए 2003 में जोड़ा गया। इस चुनाव में NOTA का विकल्प नहीं होता।

विधान परिषद: यूपी के 100 सदस्य

यूपी उन राज्यों में है, जहां दो सदन हैं। इसलिए यहां राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव दोनों होते हैं। संविधान का अनुच्छेद 171 विधान परिषद की बनावट तय करता है। यूपी विधान परिषद के 100 सदस्य इस तरह चुने जाते हैं:

  • 38 सदस्य विधायक चुनते हैं।
  • 36 सदस्य स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि चुनते हैं।
  • 8 सदस्य स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं।
  • 8 सदस्य शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं।
  • 10 सदस्य राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

स्नातक क्षेत्र में वे लोग वोट डालते हैं, जिन्हें स्नातक हुए कम से कम तीन साल हो चुके हों। शिक्षक क्षेत्र में तय स्तर के शिक्षण संस्थानों में कम से कम तीन साल पढ़ा चुके शिक्षक वोटर होते हैं।

विधान परिषद भंग नहीं होती। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 साल होता है और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। सदस्य बनने के लिए न्यूनतम उम्र 30 साल है।

विधानसभा की संख्या क्यों अहम है

राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में जीत काफी हद तक विधानसभा में दलों की ताकत से तय होती है। जिस दल के पास ज्यादा विधायक होते हैं, उसे ज्यादा सीटें मिलती हैं। अगर उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर हो, तो वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ती और सभी निर्विरोध चुने जाते हैं।

संविधान का पूरा पाठ विधि मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव का हाल का उदाहरण हमारी रिपोर्ट यूपी राज्यसभा चुनाव में सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध में है। उम्मीदवारों के चयन पर भाजपा के जातीय समीकरण वाली रिपोर्ट भी देखें।

स्रोत

  1. Legislative Department, Govt of India: Constitution of India (Articles 80, 83, 84, 171, 172, 173)
  2. Uttar Pradesh Legislative Assembly (official website)
  3. Wikimedia Commons: Glimpses of the new Parliament Building, New Delhi

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Sudhanshu Tiwari

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी UP Election News (upelectionnews.com) के संस्थापक और संपादक हैं। वे उत्तर प्रदेश की राजनीति, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, राज्यसभा और उपचुनावों, चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों और ओपिनियन पोल पर लिखते हैं। वेबसाइट पर क्या प्रकाशित होगा, इसका अंतिम फैसला और प्रकाशित खबरों की संपादकीय ज़िम्मेदारी उन्हीं की है। UP Election News का संचालन DB PR Solution करती है; जिन खबरों में DB PR Solution के किसी क्लाइंट या उसके अपने सर्वे का ज़िक्र होता है, उन पर अलग से खुलासा (डिस्क्लोज़र) दिया जाता है। किसी खबर में गलती दिखे तो info@upelectionnews.com पर लिखें।

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