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राष्ट्रीय राजनीति

मद्रास हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी नेता सौरव दास की नागरिकता पर मांगा जवाब

मद्रास हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी नेता सौरव दास की नागरिकता मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया है।

मद्रास हाईकोर्ट का भवन और अदालत परिसर
ग्राफिक: UP Election News

मद्रास हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक नेता की नागरिकता की सत्यता की जांच की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक पक्षों के साथ अन्य दस संबंधित पक्षों को भी जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। यह कानूनी कदम देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय चेहरों की पृष्ठभूमि की औपचारिक जांच के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांचीपुरम के एक स्थानीय व्यवसायी की तरफ से अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। इस याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास के मूल रूप से नेपाल से जुड़े होने की बात उठाते हुए उनकी राष्ट्रीयता की गहराई से जांच कराने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता आनी बेहद आवश्यक है ताकि सार्वजनिक मंचों पर काम करने वाले नेताओं की पहचान को लेकर कोई संशय न रहे।

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मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुण मुरुगन की खंडपीठ ने इस पूरे मामले की सुनवाई की और याचिका पर संज्ञान लिया। अदालत ने इस प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार के अलावा क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को भी आधिकारिक रूप से नोटिस भेजा है। इसके साथ ही इस याचिका में शामिल अन्य दस संबंधित पक्षों को भी तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और आगे की प्रक्रिया

न्यायालय द्वारा दिए गए छह सप्ताह के इस निर्देश के बाद अब सभी संबंधित विभागों और पक्षों को निर्धारित अवधि में अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कौन से नए दस्तावेज सामने आते हैं और प्रशासन की तरफ से क्या आधिकारिक रुख अपनाया जाता है, इस बारे में विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

इस कानूनी विवाद के बढ़ने से राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल के नेता की मूल पहचान और राष्ट्रीयता से जुड़ा मामला गंभीर श्रेणी में आता है। अदालत के आगामी रुख और सुनवाई की अगली तारीख पर अब हर पक्ष की कानूनी टीम की निगाहें टिकी रहेंगी।

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स्रोत: इंडिया टीवी; द हिंदू

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